अनफिट रहकर भी एनकाउंटर टीम को किया लीड

भोपाल,  सिमी आतंकियों के जिस एनकाउंटर को लेकर मप्र पुलिस सुर्खियों में है, उसे अंजाम देने वाली टीम का नेतृत्व एक ऐसे पुलिस अधिकारी ने किया, जिसे पहले अनफिट करार कर देने की कोशिश की गई थी। आठ घंटे में फुर्ती दिखाते हुए क्राइम ब्रांच के डीएसपी डीएस चौहान ने अपनी टीम के साथ एनकाउंटर को लीड किया था।
जबकि चौहान को डीआईजी रमन सिंह सिकरवार ने अपने पत्र में अनफिट बताया था। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि चौहान ने 31 अक्टूबर को अचारपुरा में उस इलाके में सर्च और एनकाउंटर ऑपरेशन को लीड किया, जहां अनफिट अधिकारी तो नहीं काम कर सकता, क्योंकि जहां आतंकी छिपे थे, वहां तक पहुंचने का रास्ता बेहद पथरीला और ऊबड़-खाबड़ है।

डीआईजी ने लिखा फील्ड में किसी काम के नहीं
नवदुनिया पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि डीआईडी रमन सिंह सिकरवार ने आठ अगस्त पुलिस मुख्यालय में एक पत्र डीएस चौहान को लेकर लिखा। अपने पत्र में डीआईजी ने लिखा कि चौहान अनफिट है और उनसे मैदानी कार्य की उम्मीद नहीं की जा सकती है। उन्होंने यह भी अनुशंसा की थी कि ऐसी स्थिति में चौहान को भोपाल जिले से बाहर पदस्थ किया जाना ज्यादा उचित होगा। हालांकि इस पत्र पर मुख्यालय की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। उधर इतने बड़े एनकाउंटर को लीड करने वाले अधिकारी की फिटनेस और डीआईजी का पत्र ही संशय में आ गया।

एफआईआर में शिकायतकर्ता भी चौहान
दिलचस्प बात यह है कि दो महीने में ही उन्हें किस तरह इतना फिट मान लिया गया कि सिमीआतंकियों के एनकाउंटर के लिए बनाई गई टीम में से एक को लीड करने की जवाबदारी उन्हें दी गई। इतना ही नहीं एनकाउंटर मामले में पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में डीएस चौहान को ही शिकायतकर्ता बनाया गया। जिनकी ओर से पूरे घटनाक्रम की जानकारी दिलवाई गई।

रीढ़ की हड्डी में है दिक्कत
जानकार बताते हैं कि डीएस चौहान को स्पाइनल यानी रीढ़ की हड्डी की परेशानी है। ऐसे में उन्हें चलने उठने में दिक्कत होती है। बताया यह भी जाता है कि उन्हें एक बार ब्रेन में क्लॉट भी हुआ था। मामले में कई बार प्रयास करने के बाद भी चौहान से बातचीत नहीं हो पाई। ऐसा इसलिए कि एनकाउंटर मामले में पुलिस अधिकारियों को मीडिया से बात नहीं करने के निर्देश दिए गए है।

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