आज कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लोग कर रहे गंगा स्नान

बिहार| आज कार्तिक पूर्णिमा है। राजधानी पटना में गंगा घाट पर आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की काफी भीड़ है। लोग अहले सुबह से ही गंगा स्नान के लिए गंगा घाट पर उमड़ पड़े हैं। काफी तादाद में लोग स्नान कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
भूतों का भी लगा मेला, ओझा भगा रहे हैं
इसके साथ ही गंगा घाट पर और भी कुछ एेसे दृश्य देखने को मिल रहे हैं जो अदभुत हैं। यहां कई ओझा भी पहुंचे हुए हैं जो भूतों को भगा रहे हैं। काफी संख्या में लोग भूत को भगाने के लिए ओझाओं की शरण में पहुंच रहे हैं। ओझा इसके एवज में काफी रुपये वसूल रहे हैं। महिलाएं खासकर भूतों की शिकार ज्यादा देखी जा रही हैं। महिलाओं से ओझा कुछ मंत्र कहता है बस शिकार महिलाएं अपने बाल खोल शुरू हो जाती हैं।
मानर (ढोल) की थाम पर झूमती महिलाएं भगत (तांत्रिक) के एक इशारे पर कांपने लगती हैं। तांत्रिक जोड़-जोड़ से मंत्रों का उच्चारण करता है और अपनी छड़ी से महिला के सिर को पानी में दबा देता है। महिला भी बिना किसी विरोध के डुबकी लगाती है।
महिला जब पानी में डुबकी लगाती है तब तांत्रिक उसके सिर को दबा देता है, जिससे वह बाहर न आए सके। दम फूलने पर महिला तड़पने लगती है, उसका पांव पानी से बाहर आ जाता है तब जाकर तांत्रिक उसे पानी से बाहर आने देता है। कहते हैं इस तांत्रिक क्रिया से भूत भाग जाता है। महिलाओं के साथ एेसा किया जाता है और महिलाएं भूत भगाने के लिए यह यातना सहती हैं।
वहीं एक ओर एक विचित्र पूजा भी हो रही है जिसमें मन्नत मांगने और पूरी होने के बाद लोग बकरी के बच्चे को गंगा में स्नान कराते हैं और उसकी पूजा करते हैं। इन बच्चों को खरीदने की होड़ लगी है क्योंकि इनके रंग का भी खासा ख्याल रखा जाता है। ये सिर्फ काले रंग के ही होने चाहिए। बच्चे को गंगा में डुबोकर फिर निकाल लिया जाता है, पूजा कर फिर सौंप दिया जाता है।
गंगा में डुबकी फिर सूर्य आराधना
गंगा में डुबकी लगाने के बाद लोग भगवान सूर्य की आराधना कर रहे हैं। कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं। बिहार के कोने-कोने से लोग गंगा स्नान करने पटना आए हुए हैं। पटना के गंगा घाट पर बिल्कुल मेले सा माहौल है। स्नान के लिए कल रात से ही बिहार के कई जगहों से श्रद्धालुओं का आना अबतक जारी है।
गंगा के साथ ही बिहार में अन्य नदियों पर भी लोगों की काफी भीड़ देखी जा रही है। लोग नदी में डुबकी लगा पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर बिहार -यूपी की सीमा पर अवस्थित बांसी नदी में और सदानीरा गंडक मे लोगों ने डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना की।
सीतामढ़ी में चोरौत पूर्वी पंचायत अन्तर्गत कोकन गाँव स्थित धौंस नदी के बृजागंगा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा अवसर पर श्रद्धालुओं नें लगाई डुबकी। शिवहर में भी कातिॅक पूणिॅमा पर लोगों ने लगाई नदी व तालाबों में डुबकी। देकुली धाम में बाबा भूवने्वर नाथ पर भी किया गया जलाभिषेक।
सोमवार को कातिॅक पूणिॅमा के अवसर पर लोगों ने बागमती नदी के डुब्बा, पिपराही , बेलवा एवं अदौरी समेत अन्य घाटों पर पहुंच नदी में स्नान को ले डुबकी लगाई। वहीं नदी घाटों पर स्नान -दान पुण्य कर देकुली धाम स्थित बाबा भूवने्वर नाथ पर जलाभिषेक कर पूजा अर्चना करते हुए दर्शन लाभ लिया । शिवालयों में भी पूजन व जलाभिषेक को लेकर भीड उमड पडी है। वहीं पिपराही ,देकुली व अदौरी में मेले का भी आयोजन किया गया है।
वहीं गया के फल्गु नदी में भी लोगों ने गंगा स्नान किया और पूजा-अर्चना की। मोतिहारी के गंडक नदी में भी श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। सारण के सरयू नदी के तट पर भी लोगों की काफी भीड़ जमा है।
हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा की काफी मान्यता है। इसे कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि इस दिन ही भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है।
कार्तिक पूर्णिमा की पूजन-विधि
इस दिन गंगा स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा-आरती करनी चाहिए। इस दिन उपवास रखना चाहिए और संभव हो तो एक समय ही भोजन करें । नमक का सेवन ना करें इस दिन और हो सके तो ब्राह्मणों को दान दें और उन्हें भोजन कराएं। शाम के समय निम्न मंत्र से चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।
मंत्र इस प्रकार है – वसंतबान्धव विभो शीतांशो स्वस्ति न: कुरु

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