आज सुनाई जाएगी सजा सेनारी नरसंहार के अभियुक्तों को

बिहार में बहुचर्चित सेनारी नरसंहार के अभियुक्तों को जहानाबाद की अदालत मंगलवार को सजा सुनायेगी। 27 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई करते हुए अपर न्यायाधीश तृतीय रंजीत कुमार सिंह की अदालत ने 15 आरोपितों को दोषी करार दिया था। वहीं साक्ष्य के अभाव में 23 लोगों को रिहा किया गया था।

न्यायालय ने धारा 146, 302, 149, 307, 149, 3/4 एस एक्ट के तहत अभियुक्तों को दोषी करार दिया था। न्यायालय ने सजा सुनाने के लिए 15 नवम्बर की तिथि मुकर्रर की थी। इधर न्यायालय के द्वारा सजा सुनाए जाने को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों की नजर न्यायालय पर टिकी हुई है। लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। किन अभियुक्तों को कितने वर्ष या कौन सी सजा मिलती है। इस पर लोगों की निगाहें टिकी है।

18 मार्च 1999 को अरवल जिले के सेनारी गांव पर हमला कर एमसीसी के हथियारबंद लोगों ने 34 सवर्णों की गला रेतकर हत्या की थी। गांव स्थित ठाकुरबाड़ी के समीप नक्सलियों ने घटना को अंजाम दिया था। इस घटना में सात लोग गंभीर रुप से घायल हुए थे। गांव की ही चिंतामणि देवी ने करपी थाने में 15 नामजद समेत चार-पांच सौ अज्ञात हमलावरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।

सेनारी नरसंहार के मामले में पुलिस के द्वारा अलग-अलग तिथियों में चार आरोप पत्र दाखिल किया था। इनमें 88 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। पहला आरोप पत्र 16 जून 1999 को दाखिल किया गया था। इसमें से 37 गिरफ्तार आरोपितों तथा 14 फरार आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र पुलिस के द्वारा दायर किया गया था। दूसरा आरोप पत्र 27 अक्टूबर 1999 को दाखिल किया गया था। तीसरा आरोप पत्र 20 फरवरी 2000 को दाखिल किया गया था। इसमें 17 गिरफ्तार आरोपितों एवं 18 फरार लोगों के खिलाफ आरोप पत्र समर्पित किया गया था।

मंगलवार को 15 आरोपितों के खिलाफ न्यायालय के द्वारा सजा सुनाई जाएगी। जिसमें विनय पासवान, अरविंद यादव, मुंगेश्वर यादव, बुटाई यादव, गोपाल साव, गोराई पासवान, ललन पासी, सत्येन्द्र दास, करिमन पासवान, उमा पासवान, बचकेश कुंवर सिंह, बुधन यादव, गनौरी मांझी शामिल हैं। दोषी करार में से दो अभियुक्त न्यायालय में उपस्थित नहीं हो पाए हैं।

 

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