आदिवासी युवाओं और महिलाओं को स्वावलंबी बना रहे हैं बसंत तिर्की

आखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश सचिव बसंत तिर्की आदिवासी युवाओं और महिलाओं का जीवन स्तर सुधारने का काम रहे हैं। वे प्रशक्षिण सह उत्पादन केंद्र और कौशल विकास के जरिए नारी सशक्तीकरण और उद्यमिता विकास की मिसाल बन गए हैं।

वर्ष 2000 में प्रबंधन (वित्त) में स्नातकोत्तर करने वाले युवा सामाजिक कार्यकर्ता बसंत तिर्की अब तक 300 से ज्यादा युवा और महिलाओं रोजगार दिलाने में मदद कर चुके हैं। बिरसानगर और गोलमुरी में कौशल विकास और प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र चला रहे हैं।

बसंत तिर्की ने बताया कि राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के तहत 2012 से उद्यमिता विकास कार्यक्रम चला रहे हैं। युवा और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए जागरूक और आर्थिक मदद भी कर रहे हैं। उनमें अपना व्यवसाय करने का आत्मविश्वास बुलंद कर रहे हैं।

2014 में झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ उद्यमी का अवार्ड पाकर बसंत तिर्की के कदम तेज हुए। कम पढ़े-लिखे और गैर अनुभवी युवाओं और महिलाओं को कई निजी कंपनियों में वेंडर बनवा रहे हैं।

बसंत तिर्की कहते हैं हर समाज की आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं की मदद होनी चाहिए। आदिवासी परिवार में महिला की बड़ी भूमिका होती है। शराब और हड़िया बेचने वाली महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास होना चाहिए।

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