किसानों ने किया केंद्र और आरबीआई के खिलाफ हल्लाबोल

सूरत। केंद्र सरकार व आरबीआई द्वारा 500 और 1000 रुपए के नोट को बंद करने के फैसले का सूरत में जबरदस्त विरोध देखने को मिला। नोटबंदी के निर्णय का विरोध करते हुए यहां के किसानों ने एक रैली निकाली और खेती में पैदा होने वाली फसल एवं दूध कलेक्टर ऑफिस के बाहर फेंका।

गुजरात के सूरत में शनिवार को किसानों ने रैली निकालकर केंद्र सरकार और आरबीआई के उस फैसले का विरोध किया जिसमें जिला को-ऑपरेटिव बैंकों से 500 और 1000 रुपए की नोट को बदलने पर रोक लगाई है। सूरत के जहांगीरपुरा से निकली इस रैली में किसानों ने ट्रकों में गन्ने, ट्रैक्टरों में धान के बोरे और टेम्पो में दूध से भरे कैन रखे हुए थे।

केंद्र और आरबीआई के फैसले के खिलाफ रैली निकालने वाले किसान नेता जयेश पटेल का कहना है कि जिला को-ऑपरेटिव बैंकों में किसानों के खाते हैं और उन्हीं खातों में सरकार ने नोट बदलने पर रोक लगा रखी है जिससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यदि सरकार ने आगामी 7 दिन के भीतर किसानों के हित में निर्णय नहीं लिया तो उसके बाद दिल्ली और मुंबई के लोगों को दूध सप्लाई करने वाली अमूल कंपनी को दूध देना बंद कर देंगे।

किसानों के नाम पर कांग्रेस की राजनीति?

सूरत में किसानों की निकली इस रैली में करीबन 150 ट्रैक्टर और 100 ट्रक शामिल हुए थे जिनमें गन्ना और अनाज भरा हुआ था। कलेक्टर ऑफिस पहुंचने के बाद किसानों ने धान से भरे बोरे को वही खोलकर फैला दिया तो गन्ने और दूध को बिखेर कर सरकार के फैसले का विरोध जताया। यूं तो सूरत की ये रैली किसानों के नाम पर किसानों को नोटबंदी से हो रही तकलीफों को लेकर निकाला गया था मगर ताज्जुब की बात ये थी कि रैली का संचालन कांग्रेस के नेता कर रहे थे। यही नहीं कांग्रेस समर्थित किसानों की इस रैली में शामिल होने वाले ज्यादातर लोग भी कांग्रेस के कार्यकर्ता थे।

किसानों की रैली में शामिल होने आए सूरत शहर कांग्रेस के अध्यक्ष से हसमुख देसाई से जब किसानों की रैली को लेकर कांग्रेस के समर्थन की बात पूछी गई तो बगले झांगते नजर आए। जबाब देते हुए उन्होंने कहा कि वो खुद एक किसान हैं और किसान होने के नाते इस रैली में शामिल होने आए हैं। सरकारी नोटबंदी से यूं तो देश की जनता काफी परेशान है और इस परेशानी से किसान अछूता नहीं है। सूरत में निकली यह रैली भी किसानों की परेशानी बयां कर रही है। हालांकि रैली में महज कांग्रेसी नेताओं के शामिल होने के कारण विरोध का सुर राजनैतिक होता नजर आया।

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