कुपोषण छिपाने के लिए मप्र के अफसरों ने बताया 12 राज्यों से बेहतर

भोपाल।पोषाहार से कम हुए कुपोषण की दलीलों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विभाग की दलीलों पर तीखा रुख अपनाया। विभाग के प्रमुख सचिव जेएन कंसोटिया ने जब कुपोषण कम होने के बारे में बताया कि देश के 12 राज्यों में मप्र से ज्यादा कुपोषण है तो मुख्यमंत्री बोल पड़े कि भ्रम फैलाने और मन को लुभाने वाले आंकड़े न बताएं, जो राज्य कुपोषण के मामले में हमसे बेहतर हैं उनसे आगे निकलने का प्रयास होना चाहिए।
सीएम ने अफसरों से कहा हमें किसी नहीं करनी तुलना, बस कलंक मिटना है
पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के दौरान इसकी स्लाइड भी दिखाई जानी थी, लेकिन जब सामने नहीं आई तो मुख्यमंत्री ने पूछ लिया- कहां गायब हो गई? आठ घंटे चली कलेक्टर-कमिश्नर-सीईओ कॉन्फ्रेंस के दौरान आधे घंटे इस पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दूसरे राज्यों से तुलना नहीं चाहिए। हमें अपना कलंक मिटाना है। पहले इस पर ध्यान दें।
सीएम ने अफसरों के कई सुझाव किए खारिज
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला बाल विकास विभाग, वन, स्वास्थ्य व अन्य संबंधित विभागों का समन्वय हो जाए तो कुपोषण पर बेहतर काम हो सकता है। इस दिशा में पहल हो। मंत्री स्तर से एक बड़ी कार्ययोजना बनाई जाए। जिसे अभियान की शक्ल देंगे। कई जगह ऐसी बेटियां भी हैं जो शादी से पहले कमजोर होती हैं। इसका असर बच्चों पर पड़ता है। इसलिए शादी से पहले ही उनका पोषण होना चाहिए। प्रेजेंटेशन के दौरान कई तरह के सुझाव दिए गए, जिन्हें मुख्यमंत्री ने खारिज कर दिया। बोले- इलाज-विलाज छोड़िए। अभी बाकी चीजों पर ध्यान दिया जाए।
– मेरी वजह से कुछ नहीं हुआ : कलेक्टर
योजनाओं के क्रियान्वयन वाले टॉप पांच जिले और पांच वो जिले जो निम्न पायदान रहे, उन्हें भी कांफ्रेंस में रखा गया। सागर का जिक्र आया तो मुख्यमंत्री ने पूछ लिया। कलेक्टर विकास नरवाल खड़े हुए और कहा, इसके लिए मैं जिम्मेदार हूं कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के आंकड़ों में सागर शून्य है। मैं भी बस, ट्रैक्टर और जीप के ऋण देता तो नंबर ज्यादा होते। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, सागर कलेक्टर सही कह रहे हैं। इसका रिव्यू ठीक तरीके से हो। ग्वालियर कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने पेंशन में फर्जीवाड़े की बात कहीं, फिर उसे संभालते हुए कहा कि कुछ लोग फर्जी हैं।
मुख्यमंत्री बोले- भ्रम फैलाने वाले आंकड़े न बताएं… हमें यह कलंक मिटाना है
…और फिर आए ऐसे सुझाव
अर्चना चिटनीस, मंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग… सुर्जना देकर उन्हें पोषित किया जा सकता है। इसमें विटामिन सी होता है। सीएम बोले इस पौधे की तो कमी है। तो रुस्तम बोल पड़े कि इसकी डाल भी लग जाती है।
पी. नरहरि, इंदौर कलेक्टर
सर कुपोषण इसलिए हो रहा है क्योंकि परिवारों में अब बच्चों की मालिश नहीं होती। यदि मालिश हो तो उनमें भूख बढ़ती है। इंदौर में हमने आयुर्वेद चिकित्सकों के साथ मिलकर यह प्रोग्राम शुरू किया है।
शिखा दुबे, प्रमुख सचिव,आयुष
सर, एक ऐसा आयुर्वेदिक तेल भी है। इसकी मालिश की जाए तो बच्चे मजबूत बनेंगे। सीएम बोले, इलाज-विलाज छोड़िए। इसकी जरूरत नहीं है।
स्वाति मीणा नायक, खंडवा कलेक्टर…सर, इसमें क्षेत्र की तासीर भी देखनी चाहिए। मंडला में भी मैं थी, वहां भी कुपोषण है और खंडवा के खालवा में भी है। मंडला के बच्चों की मौत हो जाती है, जबकि खालवा में नहीं।
धुर्वे बोले- मैं मंत्री हूं, फिर भी कमियां बताऊंगा… श्रम विभाग ने उपलब्धियां बताईं तो श्रममंत्री ओम प्रकाश धुर्वे ने कहा- आवास योजनाओं की किस्तें नहीं मिल रहीं। डिंडोरी-उमरिया में तो वन भूमि के पट्टों पर मकान बनाना मुश्किल है। सीएम ने कहा- जबलपुर के कमिश्नर मंत्री को रिपोर्ट दें।

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