गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा ने जगाई भविष्य की उम्मीद

उत्तरकाशी, आपदा के बाद पहली बार गंगोत्री-यमुनोत्री की यात्रा सुखद अहसास कराने वाली रही। वर्ष 2014 की अपेक्षा इस बार गंगोत्री व यमुनोत्री धाम पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या में छह गुना अधिक की बढ़ोत्तरी हुई। इससे स्थानीय लोगों के साथ ही व्यापारियों के चेहरे भी खिल उठे। इससे अगले यात्रा सीजन के लिए भी उम्मीदें जगी हैं।
वर्ष 2013 में आई भीषण आपदा के बाद चारधाम यात्रा पूरी तरह पटरी से उतर गई। इसके चलते बीते तीन सालों बहुत कम यात्री गंगोत्री व यमुनोत्री धाम पहुंचे। नतीजा यात्रा पर निर्भर रहने वाले लोगों समेत छोटे-बड़े व्यवसायियों खासा नुकसान झेलना पड़ा।
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वर्ष 2014 में जहां गंगोत्री धाम पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या 45 हजार रही, वहीं यमुनोत्री धाम मात्र 38 हजार यात्री ही पहुंचे। लेकिन, इस बार अब तक दो लाख 87 हजार 376 यात्री गंगोत्री और एक लाख 60 हजार 234 यात्री यमुनोत्री धाम पहुंच चुके हैं।अब उत्तराखंड की सीमाओं पर रहेगी सीसी कैमरों से नजर
यह आंकड़ा 2014 के मुकाबले छह गुना अधिक है। जो भविष्य के लिए एक अच्छा संकेत माना जा रहा है। साथ ही लोगों में इस बार शीतकालीन पर्यटन बढऩे की उम्मीद भी जगी है। उत्तरकाशी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पुरी कहते हैं कि इस बार की यात्रा सुखद अहसास कराने वाली रही। उम्मीद है कि आने वाला सीजन और भी फलदायी साबित होगा।उत्तराखंड में चांद से भी ‘दूर’ है एक गांव, जानने के लिए क्लिक करेंछह माह मुखबा में गंगा व खरसाली में होंगे यमुना के दर्शन
छह माह की ग्रीष्मकालीन यात्रा के बाद अन्नकूट पर्व पर 31 अक्टूबर को गंगोत्री और एक नवंबर को भैयादूज के मौके पर यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। इसके बाद छह माह तक मां गंगा के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास मुखीमठ (मुखबा) और यमुना जी के दर्शन खुशीमठ (खरसाली) में होंगे। गंगोत्री हाईवे को चौड़ा करने के लिए कुर्बान होंगे 6500 पेड़

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