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चिरप्रतिद्वंद्वी की जीत से कुलदीप खेमे में है सन्नाटा, शिशुपाल बने प्रधान

र्चित दुष्कर्मकांड में कुलदीप सिंह के खिलाफ फैसला सुनाते हुए अदालत पहले ही सजा सुना चुकी थी और जनता ने भी पंचायत चुनाव में उसके खिलाफ ही अपना फैसला दिया है। अब माखी ग्राम पंचायत कुलदीप सिंह सेंगर का गढ़ नहीं रहा है, यहां पर जनता ने चिरप्रतिद्वंद्वी शिशुपाल सिंह को प्रतिनिधि चुनकर उसके खिलाफ अपना मत स्पष्ट कर दिया है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना के दूसरे दिन माखी ग्राम पंचायत का परिणाम आने पर शिशुपाल प्रधान बन गए हैं। इससे पहले कुलदीप के अनुज अतुल सिंह की पत्नी प्रधान थीं और बीते काफी समय से सीट पर सेंगर परिवार का ही कब्जा रहा है। हालांकि इस बार उसके परिवार से कोई भी चुनाव मैदान में नहीं था।

पंचायत चुनाव की मतगणना के दूसरे दिन सोमवार को बहुचर्चित माखी ग्राम सभा का भी परिणाम आ गया। यहां से दुष्कर्म कांड में सजायाफ्ता कुलदीप िसिंह सेंगर के चिरप्रतिद्वंदी शिशुपाल सिंह ने जीत हासिल की है। उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंदी राम मिलन यादव को 2213 मतों से हरा दिया है। उनकी जीत से साफ हो गया है कि जनता ने भी अपना मत स्पष्ट कर दिया है। कुलदीप के खिलाफ कभी मुंह खोलकर न बोलने वाली जनता ने प्रतिद्वंद्वी को प्रधान बनाकर अपना फैसला बता दिया है।

बताते चलें कि 2015 के पंचायत चुनाव में भी कुलदीप सिंह सेंगर के अनुज अतुल सिंह की पत्नी अर्चना सिंह ने शिशुपाल की पुत्रवधू को चुनाव हराकर प्रधान पद पर कब्जा जमाया था। इससे पहले कुलदीप की मां चुन्नी देवी प्रधान रही थीं। हालांकि इस बार यहां के चुनाव में दुष्कर्म मामले में सजायाफ्ता कुलदीप सिंह सेंगर के परिवार से कोई भी नहीं उतरा था। फिर भी यह माना जाता था कि माखी गांव कुलदीप सिंह सेंगर का गढ़ है, ऐसे में सीट से चिरप्रतिद्वंद्वी के निर्वाचित होने से नई चर्चा को हवा मिल गई है। फिलहाल माखी में जहां एक तरफ कुलदीप सेंगर खेमे में सन्नाटा है तो दूसरी तरफ शिशुपाल सिंह समर्थकों में जश्न का माहौल है।

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