जानिए कितने बैंक में और घट सकती हैं ब्याज दरें

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने बताया कि नोटबंदी के बाद बैंकिंग प्रणाली में जो अतिरिक्त नकदी आ रही है, वह जल्द वापस नहीं निकलेगी
नई दिल्ली- केंद्र सरकार की तरफ से लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद आपके फिक्स्ड डिपॉजिट पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने बताया कि नोटबंदी के बाद बैंकिंग प्रणाली में जो अतिरिक्त नकदी आ रही है, वह जल्द वापस नहीं निकलेगी। इससे भविष्य में ब्याज दरों को नीचे लाने में मदद मिल सकती है। इससे पहले बीते गुरुवार को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने जमा पर ब्याज दरों को 15 बेसिस अंक घटा दिया है। यह दर एक से तीन साल तक की जमाओं के लिए घटाई गयी हैं। गौरतलब है कि बीते 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान 500 और 1000 रुपए के नोट पर बैन लगाने की घोषणा की थी, इसके बाद से ही लोग भारी मात्रा में अपनी नकदी बैंकों में जमा कर रहे हैं।

एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘सरकार का हालिया नोटबंदी कदम स्वागतयोग्य है। भारी मात्रा में पैसा बचत और चालू खातों में आ रहा है। इस भारी राशि से प्रणाली में अधिशेष तरलता की स्थिति बनी है। हमारा मानना है कि यह जल्दबाजी में नहीं निकलेगा। इससे ब्याज दरें और नीचे आएंगी।’ ब्याज दरें कम होने का सीधा सा मतलब है कि अब एफडी पर आपको कम ब्याज मिलेगा।

सरकार ने पुराने नोटों को जमा करने को दिया है 50 दिन का समय:
सरकार ने लोगों को पुराने नोटों को अपने बैंक खातों में जमा करने के लिए 50 दिन का समय दिया है। इस वजह से एसबीआई का नकद जमा 17 नवंबर तक 1.27 लाख करोड़ रुपS बढ़ गया। एसबीआई का मानना है कि इसके अलावा इससे मुद्रास्फीति भी चार फीसदी से नीचे आएगी। अक्टूबर में खुदरा मुद्रास्फीति 4.20 फीसदी तथा थोक मुद्रास्फीति 3.39 फीसदी पर रही है।

क्यों घटा रहे हैं बैंक जमा पर ब्याज दरें?
भारी नकदी आने के बाद बैंकों पर इस जमा पर ब्याज देने का दवाब है, जिसके कारण बैंक अब जमा पर ब्याज दरें घटा रहे हैं। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जनवरी 2015 से अब तक नीतिगत दरों में 175 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है। इस कटौती को ग्राहकों तक पहुंचाने का दवाब बैंकों पर है।

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