वैलिड करेंसी न होने के कारण जूझ रहा आढ़त बाज़ार

देहरादून का आढ़त बाजार में भी नोटबंदी के बाद कारोबार में मंदी के दौर से गुज़र रहा है. आढ़तियों का कहना है कि कारोबार घटकर आधे से भी कम रह गया है. थोक दुकानदार छोटे दुकानदारों को उधार में भी ज्यादा सामान नहीं दे पा रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक पर्याप्त मात्रा में करेंसी लोगों को नहीं मिलेगी तब तक परेशानी होगी.

देहरादून के आढ़त बाज़ार में आजकल ट्रैफिक की भीड़ तो दिखाई दे रही है लेकिन कारोबारियों की भीड़ कम है. देहरादून के पुराने आढ़त बाज़ार में नोट बंदी का असर देखने को मिल रहा है. इस बाजार से चावल और दालों का थोक कारोबार तो होता ही है साथ ही कई अन्य प्रकार का सामान भी मिलता है. लेकिन आड़तियों का कहना है कि आढ़त बाजार में इन दिनों कारोबार नीचे फिसलकर आधे से भी कम रहा गया है.

 

छोटा दुकानदार नई और वैलिड करेंसी ना होने के चलते आढ़त से माल नहीं ले रहा है और आढ़ती ऊपर भी पेमेंट नहीं कर पा रहे हैं. आढ़तियों का कहना है कि छोटे दुकानदार ज्यादातर कैश में ही पेमेंट करते हैं. हालांकि छोटे दुकानदारों को उधार में भी माल दिया जा रहा है लेकिन सबको उधार नहीं दिया जा सकता है. आढ़ती राकेश गुप्ता कहना है कि नोटबंदी के बाद कारोबार करीब 30से 40 फीसदी रह गया है. लोगों के पास पैसा नहीं है. बैंक से भी कम मिल रहा है.

तेल और दालों के विक्रेता अँशुल गुप्ता कहते हैं कि मोदी सरकार का फैसला ठीक है लेकिन पैसा ना आने की वजह से माल नहीं बिक रहा, और ऊपर भी पैसा नही पहुंचा पा रहे हैं. कुछ रिटेलर को उधार माल दे रहे हैं लेकिन सबको उधार नहीं दे सकते हैं. कुछ आढ़ितियों का ये भी कहना है कि नोट बंदी का फैसला तो सही है लेकिन दिक्कत ज्यादा हो गई है. जिसको ठीक होने में थोड़ा समय लगेगा.

आढ़त बाज़ार में छोटे दुकानदारों का ज्यादातर काम कैश ट्रांजेक्शन से ही होता है. हालांकि प्लास्टिक मनी और बैंक द्वारा ट्रांजेक्शन से खरीदारी करने की चलन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है लेकिन आढ़त बाजार में भी कैश से ट्रांजेक्शन के उदाहरण देखने को मिल रहे हैं.

कारोबार में शीघ्र उछाल की उम्मीद लगाए आढ़ती देवेंद्र गोयल का कहना है कि जैसे सरकार फैसले करेगी वैसे ही चलना पड़ेगा. लेकिन काम मंदा है और पर्याप्त करेंसी की जरुरत महसूस हो रही है.

बहरहाल. माना जा रहा है कि बैंको से वैलिड करेंसी फिलहाल लोगों के हाथ में कम मात्रा में आने से बाजारों में खरीदारी भी कम हो रही है. यानि प्रतीक्षा पर्याप्त पैसा मिलने की हो रही है.

 

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