हॉर्मोन की गड़बडिय़ों से होने वाली तकलीफों से मुक्ति मिल जाएगी…..

वह मेरी अपनी आजादी का दिन होगा-15 अगस्त, 2014.’’ कहते हुए पूजा झावेरी मुस्कराती हैं. जब देश आजादी के 68वें साल की सुबह में आंखें खोलेगा, मुंबई के एक अस्पताल में पूजा अपनी नियति से गुपचुप मुलाकात कर रही होंगी.

उस दिन सर्जन उनकी थायरॉयड ग्रंथि का एक हिस्सा निकाल देंगे और इस तरह उम्मीद यही है कि उन्हें जिंदगी भर हॉर्मोन की गड़बडिय़ों से होने वाली तकलीफों से मुक्ति मिल जाएगी. भविष्य में होने वाली किसी संभावित बीमारी की आशंका से बचने के लिए आज ही सर्जन की चीरफाड़ के ख्याल से शायद ही कोई इतना खुश हो, जितना नेपियन सी रोड में रहने वाली 23 वर्षीया यह लड़की है, जो अब हांगकांग में काम करती है.

 

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इसका कारण यह है कि अब वह अपने जीन की प्रवृत्तियों को मात देने में लगी है. और यह उसका निहायत निजी फैसला है. उसने फैसला किया कि इससे पहले कि बीमारी उसे सताए, उसे होने वाली संभावित बीमारी की आशंका को ही शरीर के तंत्र से बाहर कर दिया जाए. उसने इस बारे में काफी सोच-विचार किया, जाना-समझा, इस पर खोजबीन की, उसके निदान या पहचान के लिए कोशिशें कीं और भविष्य में कोई परेशानी न हो, इसलिए अब वह उससे मुक्त होने जा रही है.

वह चिकित्सा की तेजी से बदलती दुनिया में बदलाव की नई प्रतीक है. चिकित्सा के इस नए संसार में शरीर की संरचना में गुणसूत्रों (जींस) से जुड़ी गड़बडिय़ों का पहले से पता करके उसके अंदेशों को दूर करने की नई संभावनाओं का दरवाजा अब खुलने लगा है.

पूजा जेनेटिक युग की लड़की है. उसका जन्म 1991 में हुआ. उसी साल जीन के रहस्य को जानने के लिए मानव जिनोम प्रोजेक्ट (एचजीपी)के रूप में व्यापक अंतरराष्ट्रीय अभियान की शुरुआत हुई. 2003 तक एचजीपी के तहत मानव शरीर में अनुमानित कुल 25,000 जीन में से हरेक के गुण-अवगुणों को जान लिया गया. इससे करीब 1,800 रुग्ण जीनों का पता चला. 2010 तक बाजार में करीब 2,000 किस्म के जेनेटिक टेस्ट उपलब्ध हो गए.

इनसे लोगों को अपने शरीर में मौजूद जेनेटिक खतरों का पता चलता है. अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुखिया, प्रमुख जेनेटिस्ट फ्रांसिस एस. कोलिंस ने 2013 में अपनी किताब लैंग्वेज ऑफ गॉड में लिखा कि 2020 तक आते-आते किसी भी व्यक्ति को उसके जीन के विश्लेषण के जरिए संभावित बीमारियों के खतरों से आगाह

करना सामान्य चिकित्सा का हिस्सा बन जाएगा.

शरीर में मोटापा सूचकांक 20 से कम, पांच फुट तीन इंच ऊंची, घने-लंबे बाल और हंसी-मजाक में तेज पूजा भरपूर ऊर्जा से लबालब दिखती है. उसे किसी तरह की बीमारी का न कोई लक्षण दिखा, न कोई परेशानी हुई और न ही उसे कोई बीमारी है. उसे कोई बुरी लत भी नहीं लगी है. वह एशिया के जाने-माने वित्तीय केंद्र हांगकांग में बतौर वित्तीय प्रोफेशनल काम करती है और वहीं रहती है.

वह रोज सुबह 9 बजे शहर के मध्य में ऊंची-ऊंची इमारतों से घिरी सड़कों को नापते हुए अपने काम पर जाती है. वह हफ्ते में 100 घंटे से ज्यादा काम करती है, घर में बना हुआ खाना खाती है (उसे दूध भी बहुत पसंद है), तैरने और जॉगिंग करने जाती है और हफ्ते में पांच दिन व्यायाम करती है. अपने वीकेंड दोस्तों सेगपशप करने और घूमने-फिरने में बिताती है.

दरअसल पिछले साल उसने पढ़ा कि हॉलीवुड स्टार एंजेलिना जॉली ने अपने जीन टेस्ट में कैंसर की 87 फीसदी आशंका के मद्देनजर सर्जरी करके अपने दोनों स्तन हटवा दिए थे. एंजेलिना के इस फैसले के बाद पूजा में भी यह जानने की इच्छा जागी कि उसके  जीन कैसे हैं और उनमें क्या संभावित है.

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