दुनिया के सभी मंत्र भगवान के मुख से निकलते हैं। पंचमकाल में मोक्ष नहीं लेकिन मोक्ष ….

संदेह की दरार ने घर, समाज और संत को तोड़ा

– गोयल नगर में संतों का मंगल प्रवेश

इंदौर। नगर प्रतिनिधि

पंचम काल में आत्माओं को जिणवाणी सुनने का अवसर मिलता है। जैन धर्म में आत्मा को परमात्मा बनाने का मार्ग बतलाया गया है। पंचमकाल में मोक्ष नहीं लेकिन मोक्ष मार्ग है। दुनिया के सभी मंत्र भगवान के मुख से निकलते हैं।

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यह बात निर्भयसागर ने गुरुवार को दिगंबर जैन मंदिर गोयल नगर में कही। उन्होंने कहा कि आज संदेह की दरार ने घर, समाज और संत को तोड़ दिया है। सबसे पहले इस दरार को भरना पड़ेगा। हम लोग संत, पंथ और ग्रंथ में उलझकर संदेह करते हैं। भारत की भूमि में जहां खोदो वहां मूर्ति निकलती है। भारतीय संस्कृति हजारों लाख वर्ष पुरानी है। इससे पहले मुनि शिवदत्तसागर, ऐलक सुदत्तसागर, क्षुल्लक तत्वसागर, क्षुल्लक चंद्रदत्तसागर का शोभायात्रा के रूप में मंगल प्रवेश हुआ। जैनेश झांझरी, सुरेश पांड्या, राजकुमार बड़जात्या, दिलीप पाटनी, सुशील पंतग्या, नरेंद्र रांवका आदि मौजूद थे।

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