16 साल बाद भी नहीं मिला झारखंड को अपना विधानसभा भवन

झारखंड-  विधानसभा का मंगलवार (22 नवंबर) को स्थापना दिवस है. जाहिर है एक बार फिर दर्द छलकेगा. दर्द यह कि 16 साल बाद भी झारखंड को अपना विधानसभा भवन नहीं मिल पाया. दर्द यह भी कि हर साल किराये के ही विधानसभा की रंगाई पुताई में लाखों रुपए खर्च हो गए.
साधा सरकार पर निशाना
विधायक नाराज हैं कि राज्य को अपना विधानसभा भवन नहीं मिल पाया. निर्दलीय विधायक गीता कोड़ा कहती हैं कि राज्य स्थापना के 16 साल बाद भी किराए के भवन में विधान सभा का संचालन होना बेशक दुखद है. कांग्रेस के विधायक आलमगीर आलम कहते हैं कि पहले की सरकार ने भी विधान सभा की इमारत तैयार करवाने की कवायद की थी. लेकिन सूबे में जमीन अधिग्रहण से जुड़ी समस्याओं ने काम को अटकाया. झामुमो विधायक कुणाल षांडगी सरकार पर निशाना साधते कहते हैं कि यह सरकार की प्राथमिकता में ही नहीं. सरकार तो व्यापारियों का कर्ज उतारने में ही लगी है. माले विधायक राजकुमार यादव अलग राग अलापते हैं कि झारखंड राज्य की स्थापना का ही उद्देश्य अब तक पूरा नहीं हुआ. ट्रैफिकिंग, बेरोजगारी, पलायन जैसी समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं.
होती रही है कोशिशें
ऐसा नहीं है कि झारखंड की सरकारों ने नए विधानसभा के लिए प्रयास नहीं किए. लेकिन प्रतिबद्धता की कमी थी. पहली बार तब के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 21 जनवरी 2014 को कूटे गांव में विधानसभा के नये भवन की आधारशिला रखी थी. लेकिन ग्रामीण आधारशिला की ईंट तक उखाड़ कर ले गए. बाद में मौजूदा मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 12 जून 2015 को फिर से शिलान्यास किया. संतोष करने वाली बात यह कि इस बार तमाम विरोध के बाद भी नए विधानसभा स्थल पर काम तेजी से चल रहा है.
थपथपायी सरकार की पीठ
भाजपा विधायक राधाकृष्ण किशोर कहते हैं कि पहली बार किसी सरकार ने अपना विधानसभा भवन बनाने की न केवल सोची, बल्कि स्वीकृति देकर काम शुरू भी कर दिया. सरकार की कोशिश है कि कार्यकाल का कम से कम अंतिम विधानसभा सत्र अपने भवन में ही संचालित हो. मंत्री राज पलिवार भी दावा करते हैं कि काम इतनी तेजी से चल रहा है कि तयशुदा समय में भवन निर्माण का काम पूरा हो जाएगा.
बहरहाल, कूटे में बनने वाली विधानसभा को जनवरी 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. भवन निर्माण सचिव के के सोन ने जानकारी दी है कि मौजूदा विधानसभा की अंतिम बैठक हर हाल में नए विधानसभा में करायी जाएगी.यह वह दावा है जिसे पूरा होते सभी देखना चाहते हैं. कारण जाहिर है. इमारत कितनी भी खूबसूरत हो, किराए के घर अपनत्व नहीं जगा पाते.

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