नागौर के रास्ते सीमा की गतिविधियां जुटाने की पाक की नापाक हरकत

नागौर: ढाईसाल पहले भारत में पाक उच्चायुक्त में वीजा कर्मचारी बनकर पहुंचे मेहमूद अख्तर उर्फ मेहबूब राजपूत ने राजस्थान में जासूसी के नए नेटवर्क को जन्म दिया। इस साजिश में जोधपुर के रास्ते बाड़मेर मूल के नागौर निवासी मौलाना और उसके बाद नागौर के सुभाष को फंसाकर जासूसी कराई गई।

पाक की इस नापाक हरकत के पीछे आशंका यह जताई जा रही है कि सीमावर्ती इलाकों में कई जासूसों की धरपकड़ के बाद दूसरे जिलों में पैसों की तंगी से जूझ रहे लोगों को शिकार बनाया जा रहा है। इस बार नागौर के लोग फंसे।

क्राइम ब्रांच दिल्ली के अधिकारियों के बयान और जासूसी के आरोप में जोधपुर, नागौर के तीन लोगों की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि अब गुजरात राजस्थान से लगती देश की सीमाओं की जासूसी सीमावर्ती लोगों से नहीं कराकर प्रदेश के बीच में बसे जिलों के लोगों से कराई जा रही है।

आसानीसे वीजा देने के बहाने बनाया गिरोह, कई जानकारियां ली

दिल्लीमें क्राइम ब्रांच की पूछताछ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पाक उच्चायुक्त के वीजा कर्मचारी मेहमूद अख्तर ने मेहबूब राजपूत बनकर जोधपुर में पासपोर्ट वीजा का काम करने वाले खांडा फलसा निवासी शोएब को लालच में लिया। शोएब को आसानी से वीजा बनाकर दिए। इसके बाद वीजा बनाने के बहाने शोएब के संपर्क में आए बाड़मेर मूल हाल नागौर में रहने वाले मौलाना रमजान को फंसाया गया। यहां मौलाना ने एक कड़ी और जोड़ी और नागौर में पैसे की तंगी से जूझ रहे सुभाष जांगिड़ से दोस्ती कर डेढ़ साल पहले उसे भी इस काम में शामिल कर लिया।

सुभाष और मौलाना की दोस्ती : नागौरमें मौलाना रमजान दो मस्जिदों में रहा। गलत हरकतों की वजह से लोगों ने उसकी पिटाई की और दोनों जगहों से निकाला। मौलाना रमजान की डेढ़ साल पहले सुभाष से दोस्ती हुई। मौलाना ने सुभाष की पैसों की तंगी की मजबूरी को भांप उसे लालच में लिया हो।

नागौर क्यों : बाड़मेरमूल का मौलाना रमजान 20 साल से नागौर में था। यहां वीजा दिलाने विदेश भेजने की बातें करने लगा था। संभावना जताई जा रही है कि वह इसी सिलसिले में जोधपुर के शोएब के संपर्क में आया। मौलाना रमजान मूल रूप से बाड़मेर का था तो शोएब का काम और आसान हो गया।

रवींद्र यादव, मामले का खुलासा करने वाले दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर

हमें छह महीने पहले सूचना मिली कि पाक हाई कमीशन में वीजा सेक्शन में काम करने वाला एक अधिकारी महमूद अख्तर आईएसआई का एजेंट है। डेढ़ साल से वो जासूसी में लगा है। आईएसआई का जासूस बनाने के लिए लोगों को रिक्रूट भी कर रहा है। हम 8 महीने से उसके मूवमेंट को ट्रेस कर रहे थे। 25 अक्टूबर को सूचना मिली कि अख्तर 26 को दिल्ली चिड़ियाघर में आने वाला है। जासूसों के साथ अति गोपनीय दस्तावेजों की डील करने वाला है। हमने जू में जाल बिछाया और उसे रंगेहाथों पकड़ लिया। महमूद पाक आर्मी की 40 वीं बलूच रेजीमेंट में हवलदार था। 3 साल पहले आईएसआई ने उसे ट्रेनिंग देकर पाक हाई कमीशन के वीजा सेक्शन में भेजा। महमूद ने कई लोगों को जासूसी के लिए तैयार किया था। वो जू, होटल, पार्क जैसी पब्लिक प्लेस पर बुलाकर अपने हैंडलरों से बीएसएफ, आर्मी के मूवमेंट की जानकारी लेता था। उसके पास से फर्जी आधार कार्ड भी मिला है। उसके साथ जिन दो भारतीयों मौलाना रमजान और सुभाष जांगिड़ को गिरफ्तार किया गया है। उनसे अख्तर हर तीन महीने में मिलता था। उनके पास से बीएसएफ के मूवमेंट और बॉर्डर एरिया के मैप मिले हैं। गिरफ्तारी के वक्त महमूद आधार कार्ड दिखा खुद को भारतीय बता रहा था। पर पूछताछ में टूट गया। उसके साथ गिरफ्तार मौलाना रमजान और सुभाष जांगिड़ नागौर के हैं। उसने कर्ज उतारने के लिए जासूसी की बात कबूल की है। जबकि रमजान मदरसे में पढ़ाता है। जोधपुर से गिरफ्तार शोएब वीजा-पासपोर्ट का काम करता है। वह महमूद के लिए भारत में जासूस को रिक्रूट करता था।

नागौर जासूसी के आरोपी सुभाष का घर

जासूसी कैसे: शोएबमौलाना को वीजा पैसे दोनों मिलते रहें और सुभाष को भी पैसे की जरूरत। लालच ने पाक कर्मचारी मेहमूद को फायदा पहुंचाया और पाक के नापाक मंसूबों को पूरा करने में जुटा। इसके लिए उसे भारत भेजा गया। मौलाना रमजान इसमें अहम किरदार बना।

जोधपुर क्यों: पाकजाने वाली विशेष ट्रेन जोधपुर से पैक होकर बाड़मेर के रास्ते पाक जाती है। इसलिए पाक आने जाने वाले लोगों को वीजा दिलाने की सबसे ज्यादा मांग जोधपुर में देखी जा रही है। यहां वीजा का काम करने वाले शोएब के ही मेहमूद अख्तर से संपर्क होने से इसकी पुष्टि होती है।

सीमा क्षेत्रों के दौरों की होगी जांच

दिल्लीपुलिस के निर्देश के बाद अब नागौर, बाड़मेर जोधपुर पुलिस इन तीनों जासूसों के दो साल की गतिविधियों की पड़ताल करने में जुटी हैं। नागौर पुलिस ने गुरुवार से ही नागौर शहर में सुभाष जांगिड़, मौलाना रमजान के संपर्क में रहे अन्य लोगों से जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। तो वहीं जोधपुर पुलिस को शोएब की गतिविधियों शोएब से जुड़े संदिग्ध लोगों से पूछताछ करने के संकेत मिले हैं। इधर खुफिया दस्ते नागौर, जोधपुर पुलिस यह तथ्य जुटाने में भी जुट गए हैं कि मौलाना रमजान, सुभाष, शोएब तीनों ने सीमावर्ती इलाकों के कब कितनी बार दौरे किए।

जासूसों से गुजरात राजस्थान से लगे इलाकों के नक्शे, दस्तावेज, बीएसएफ संबंधी सूचनाएं, रिटायर्ड वर्तमान अधिकारियों के संबंध में डाटा मिले हैं। पाक के नापाक अधिकारियों ने शोएब के जरिए मौलाना रमजान सुभाष से इलाकों की जासूसी करवाई है।

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