फ्री वाई-फाई पर मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करना हो घातक

नोटबंदी के बाद मोबाइल वॉलेट का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। शॉपिंग मॉल और बड़ी दुकानों से लेकर खुदरा व्यापारी, फल-सब्जी बेचने वाले और चाय की दुकानों पर ई-वॉलेट का चलन शुरू हो गया है। लेकिन लोगों के मन में यह भी सवाल है कि यह कितना सुरक्षित है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि ई-वॉलेट का इस्तेमाल कभी भी सार्वजनिक या मुफ्त के वाई-फाई में नहीं करना चाहिए। भारत और सार्क देशों में आरएसए के प्रंबध निदेशक कार्तिक शहानी के मुताबिक, नेट बैंकिंग और कार्ड से लेन-देन के मुकाबले मोबाइल वॉलेट में उपभोक्ताओं के सत्यापन की प्रक्रिया जोखिम भरी है। वहीं कंपनियों का कहना है कि मोबाइल वॉलेट कार्ड के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित हैं। पेटीएम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नितिन मिश्र ने कहा, हमारी सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह मशीन आधारित है और संदिग्ध लेनदेन को रोका जाता है।

उपभोक्ता को मोबाइल वॉलेट को कंपनियों के आधिकारिक साइटों, गूगल प्ले और अधिकृत प्ले स्टोर से ही डाउनलोड करना चाहिए। पासवर्ड सिर्फ अंकों में न हो। इसे अंक, शब्द और स्पेशल कैरेक्टर को मिलाकर बनाएं।

हैकर्स मोबाइल वालेट एक साथ खाली नहीं करते। वह उसमें से थोड़ी-थोड़ी रकम चुराते हैं इसलिए समय-समय पर अपनी राशि चेक करते रहें।
पासवर्ड बदलते रहे एक ही पासवर्ड को कई महीनों तक न रखें। समय-समय पर बदलते रहें। हो सके तो अपना पासवर्ड 10 से 15 दिन में बदल डालें।
ई-वालेट से भुगतान के लिए सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल न करें। इससे हैक होने की संभावना ज्यादा है।

कैश बैक के छलावे में पड़ कर कोई ई-वालेट उपयोग में न लें। आरबीआई की वेबसाइट पर यह जरूर देख लें कि उस वालेट कंपनी के पास लाइसेंस है या नहीं।

जब ई वालेट से भुगतान करते हैं तो कार्ड की जानकारी लिखते ही इसके भविष्य में उपयोग के लिए सेव कार्ड का आप्शन आता है। इसमें जानकारी सेव करने से बचें। जिससे आपका वालेट हैक होने से आपको ज्यादा नुकसान न उठाना पड़े।

 

Check Also

गूगल सीईओ सुंदर पिचाई पद्म भूषण से किए गए सम्मानित

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई पद्म भूषण पुरस्कार से किए गए सम्मानित, कहा-: जहां जाता …