बिन ब्याही 39 बच्चों की माँ को सम्मानित करेंगे राष्ट्रपति

झारखंड के गोड्डा की वंदना दुबे 14 नवंबर को दिल्ली में राजीव गांधी मानव सेवा पुरस्कार से सम्मानित होंगी. यह सम्मान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों दिया जाएगा. मानव सेवा क्षेत्र से यह पुरस्कार पाने वाली वंदना दुबे झारखंड की पहली महिला हैं. वंदना दुबे पिछले 12 वर्षों से अनाथ बच्चों की सेवा कर रही हैं. वंदना ने अनाथ आश्रम की नींव विवेकानंद जयंती के दिन 12 जनवरी 2005 में रखी थी. सिर्फ दो अनाथ बच्चों से शुरू किया गया सफर बिना किसी सरकारी सहायता के लगातार जारी है. आज 39 बच्चे वंदना की गोद में हैं. सेवा में तल्लीन वंदना ने अब तक शादी नहीं की है और सभी बच्चे उसे मां ही कहते हैं.

इन बच्चों की देखरेख, अस्पताल, स्कूल आदि तक का खर्च वंदना खुद उठाती है. कुछ डॉक्टर, व्यवसायी, अफसर और कुछ मीडिया कर्मी कभी कभार चावल, आटा, इंधन वगैरह पहुंचा देते हैं, पर सरकार की तरफ से कभी कोई फंड इन्हें नहीं मिला. बगैर किसी सरकारी मदद के यहाँ तक का सफर तय करने में कई बार परिवार के लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा. मगर आज जब देश के महामहिम राष्ट्रपति के हाथों 14 नवम्बर को पुरस्कृत करने की चिठ्ठी मिली तो सभी परिजन भी वंदना के कायल हुए.

जाहिर की खुशी-

सम्मान मिलने की ख़ुशी जाहिर करते हुए उसने कहा कि अब यही बच्चे मेरे परिवार हैं और इन्हीं को पढ़ा लिखाकर कुछ बना देना मेरा सबसे बड़ा कर्तव्य होगा . कहा कि पुरस्कार की घोषणा से मुझे एक नयी उर्जा मिली है .

 

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