ब्रिटिश पीएम बोलीं: भारत के लिए वीजा पॉलिसी वैसी ही रहेगी

ब्रिटेन में काम कर रहे आईटी प्रोफेशनल्स के लिए राहत की खबर है। भारत दौरे पर आईं ब्रिटिश पीएम ने आश्वस्त किया है कि भारत के लिए उनकी वीजा पॉलिसी वैसी ही रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत के साथ पहले से ही वीजा नियम अच्छे हैं, उनमें बदलाव की जरूरत नहीं है। मे ने ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने के बाद द्विपक्षीय संबंधों के मद्देनजर पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना। वे यहां टेक समिट में भाग लेने आई हैं।
थेरेसा मे का वीजा नियमों को लेकर आया ताजा बयान भारत के लिए इस बहुत खास है, क्योंकि हाल ही में ब्रिटेन के गृहमंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा था कि गैर यूरोपीय यूनियन देशों से ब्रिटेन आने वाले लोगों के लिए वीजा नियमों में बदलाव किए जाएंगे। नए वीजा नियमों को इसी नवंबर के महीने में लागू करने की बात कही गई थी।
ब्रिटेन के गृहमंत्रालय से कहा गया था कि 24 नवंबर के बाद टायर 2 इंफ्रा-कंपनी ट्रांसफर (आईसीटी) के तहत जो भी वीजा के लिए आवेदन करेगा, उसे कम से कम 30 हजार पाउंड वाली हाई सैलरी दिखानी होगी, पहले यह आंकड़ा 20 हजार 800 पाउंड का था।

आईसीटी रूट को ब्रिटेन में सबसे ज्यादा भारतीय कंपनियां इस्तेमाल करती हैं। यूके माइग्रेशन एडवाइजरी कमेटी ने पिछले साल बताया था कि 90 फीसदी भारतीय आईटी कर्मियों को इसी रूट के तहत वीजा दिया जाता है।
ब्रिटिश पीएम ने कहा कि ब्रिटेन ने चीन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के मुकाबले भारत के लिए ज्यादा वर्कर वीजा रखे हैं।

पत्रकारों से बात करते हुए ब्रिटिश पीएम ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूती प्रदान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन भारतीय नागरिकों के ब्रिटेन आने के लिए नियमों को और आसान बना रहा है, खासकर कारोबारियों के लिए सभी दरवाजे खुले हैं।

मे ने जोर देते हुए कहा कि हम भले ही यूरोपीय यूनियन से अलग हो गए हैं, बावजूद इसके ब्रिटेन व्यापार और निवेश करने की दृष्टि से सबसे बेहतर जगहों में से एक है।

पीएम मोदी ने भी ब्रिटेन के साथ अच्छे व्यापारिक संबंधों की बात कही और कहा कि इससे ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम को भी मजबूती मिलेगी।

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