भारत की नजर वियना बैठक पर

नई दिल्ली। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) द्वारा नियुक्त विशेष दूत राफेल ग्रॉसी आगामी 11-12 नवंबर को वियना में होने वाली एनएजजी सलाहकार समूह की बैठक में एक, दो चरणों वाली प्रक्रिया का प्रस्ताव पेश पेश कर सकती है जिसके अनुसार गैर एनपीटी सदस्यों को भी एनएसजी में सदस्यता हासिल हो सकती है।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक एनएसजी के लिए काफी लंबे समय से प्रयासरत भारत के पक्ष में इस बार कोई सकात्मक निर्णय मिलने की उम्मीद है। इससे पहले अमनदीप गिल के नेतृत्व में भारत के एक प्रतिनिधिमंडल ने वांग कुन के नेतृत्व वाले चीनी शिष्टमंडल के साथ बैठक की थी लेकिन यह बैठक बेनतीजा रही।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने बताया, “हम एक समाधान की तलाश करेंगे जो सभी गैर एनपीटी देशों पर लागू हो और इसके बाद हम गैर एनपीटी देश के प्रासंगिक विशिष्ट आवेदन पर चर्चा करेंगे।” हुआ चुनयिंग ने कहा, “हम इस संबंध में भारत के साथ बातचीत जारी रखना चाहते हैं।” जहां चीन आपसी बातचीत को लेकर सहमति जता रहा है वहीं चीनी राजनयिक इस बात पर प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या ग्रोसी वास्तव में सभी देशों के बहुमत को लेकर आश्वस्त हैं।

इन सब के अलावा, भारत ने एमटीसीआर की बैठक में इसकी सदस्यता हासिल करने के बाद 1 अक्टूबर को बुसान में हुई इसकी बैठक में पहली बार भाग लिया। पिछली बार भारत की एनएजी की सदस्यता का विरोध करने वाले न्यूजीलैंड के रूख में भी इस बार नरमी आई है। पिछले हफ्ते भारतीय नेतृत्व के साथ हुई बातचीत के बाद न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन की ने भारत के एनएसजी प्रस्ताव को लेकर गंभीरता दिखायी है, हालांकि न्यूजीलैंड ने अभी तक पूरी तरह से अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

 

इससे पहले भारत की एनएसजी की राह में रोड़ा अटकाने वाले आयरलैंड, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड जैसे देशों ने भी भारत को समर्थन देने को लेकर चुप्पी साधी है। तुर्की अभी भी पाकिस्तान से अपने संबंधों को लेकर एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध कर रहा है।

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