महागठबंधन बनाने की कसरत पर कांग्रेस को बड़ा झटका

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में गठबंधन से समाजवादी पार्टी के मुखिया के इन्कार करने के बाद से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पार्टी में प्रशांत किशोर ‘पीके’ विरोधी लामबंदी तेज होने से प्रचार अभियान भी प्रभावित हो रहा है।

दलित संदेश अभियान से ‘टीम पीके’ की छुट्टी कर देने के साथ ही कांग्रेस में सभी सीटों पर अकेले चुनाव लडऩे की आवाज उठने लगी है। विगत करीब एक पखवाड़े से कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ‘पीके’ के समाजवादी पार्टी, रालोद व जनता दल (यूनाईटेड) नेताओं से मुलाकात कर बिहार की तर्ज पर महागठबंधन बनाने की कसरत पर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के बयान ने पानी फेर दिया।

गठबंधन से मुलायम सिंह के मुकर जाने की वजह चाहे जो रही लेकिन इससे कांग्रेस का मिशन- 2017 जरूर धड़ाम हो गया। पार्टी के भीतर ‘पीके’ विरोधी खेमे ने सक्रियता बढ़ाते हुए समानांतर तैयारी आरंभ कर दी है। खासकर दलित और मुस्लिम नेताओं को ‘पीके प्लान’ जरा भी समझ में नहीं आ रहा।

सांसद पीएल पुनिया का कहना है कि गठबंधन की चर्चाओं से कांग्रेस के दलित जोड़ो अभियान को बड़ा झटका लगा। दलित वर्ग समाजवादी पार्टी को समर्थन देने के लिए राजी नहीं क्योंकि पदोन्नति आरक्षण और उत्पीडऩ बढऩे जैसे मुद्दे नाराजगी की अहम वजह है। पुनिया का कहना है कि कांग्रेस सभी सीटों पर चुनाव लड़े तब ही 2019 में केंद्र में सरकार बनाने को लड़ सकेगी।

ओबीसी कोटे में कोटा अभियान शुरू नहीं हो सका:

पीके के खिलाफ पार्टी में बढ़े असंतोष को देखते हुए प्रचार अभियान भी थम गया है। अनुसूचित जाति विभाग की दलित कांग्रेस यात्राएं अब नहीं निकाली जाएंगी। यात्राओं के बदले कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर गांवों में घुमाया जाएगा। अति पिछड़ों के लिए आरक्षण में अलग कोटा निर्धारित करने की मांग को लेकर वोट बैंक बनाने की मुहिम भी थमी है। राहुल संदेश यात्रा का दूसरा चरण भी फ्लाप सिद्ध हुआ।

पार्टी में भगदड़ की आशंका:

पीके के गठबंधन प्लान में कांग्रेस के खाते में अपेक्षित सीटें न मिलने की आशंका से टिकट के दावेदारों में बेचैनी बढ़ी है। पूर्व विधायक नसीब पठान का कहना है कि गठबंधन को मीडिया में सुर्खियां बनाकर ‘पीके’ ने अपनी ब्रांडिंग जरूर की परंतु कांग्रेस की हवा निकाल दी। सूत्रों का कहना है कि टिकट न मिलने से आशंकित दावेदारों ने अन्य दलों में संभावना तलाशनी शुरू कर दी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा जोशी समेत नौ विधायक कांग्रेस को छोड़कर अन्य दलों में ठिकाना बना चुके हैं।

गठबंधन में रालोद को फिर मात:

चुनावी गठबंधन की सियासत में माहिर रहे राष्ट्रीय लोकदल मुखिया अजित सिंह फिर मात खा गए। कभी भाजपा और कभी जदयू से विलय की चर्चा चलने बाद रालोद द्वारा गत राज्यसभा व विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी के पक्ष में मतदान करने के बाद से सपा से मेल की चर्चा जोड़ पकड़े हुए थी। परसों सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन नहीं विलय का प्रस्ताव पेश कर रालोद को भी तगड़ा झटका दिया है।

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