एक मानव का दूसरे मानव के प्रति व्यवहार कैसा होना चाहिए।

छावनी में आयोजित नौ दिनी राम कथा का समापन

इंदौर। राम कथा को जीवन में उतारने की आवश्यकता है। यह कथा हमें सिखलाती है कि एक मानव का दूसरे मानव के प्रति व्यवहार कैसा होना चाहिए। राम राज्य की स्थापना के लिए आवश्यक है हम एक दूसरे का आदर करें।

 

 

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यह उद्गार पं. कृष्णकांत शास्त्री ने व्यक्त किए। वे बुधवार को पारसी मोहल्ला छावनी में चल रही नौ दिनी रामकथा के समापन पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अपने आराध्य की बुराई कभी साधक को अच्छी नहीं लगती है। हनुमानजी भी उसी पर प्रसन्ना होते हैं जो उनके प्रभु की प्रशंसा करता है। पवन पुत्र को प्रसन्ना करने के लिए भी श्रीहरि का नाम जपना चाहिए। भवसागर से तरना है तो कलयुग में भगवान राम के नाम का आसरा लेना चाहिए। जीवन के संघर्ष से निजात पाने के लिए राम ही मानव का सबसे बड़ा सहारा है। इस सहारे के जरिए वह हर मुश्किल को दूर कर सकता है। सेवा समिति के मनीष शर्मा ने बताया कि अंतिम दिन भंडारे का आयोजन किया गया। केके गोयल, दिनेश मल्हार, उमेश शर्मा, घनश्याम व्यास, मीनू शर्मा, मुकेश गौड़ आदि मौजूद थे।

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