मेडल चाहिए तो खिलाड़ियों को खिलाएं कड़कनाथ

यशवंतसिंह पंवार, झाबुआ। जापान के टोकियो में 2020 में होने वाले ओलिंपिक के लिए भारत को यदि पदक संख्या बढ़ानी है तो खिलाड़ियों की डाइट में झाबुआ का दुर्लभ कड़कनाथ मुर्गा शामिल करना चाहिए। कुछ ऐसा ही प्रस्ताव बनाकर कृषि विज्ञान केंद्र ने तीन दिन पूर्व ओलिंपिक संघ को भेजा है। इसमें कड़कनाथ को डाइट में शामिल करने से ओलिंपिक में पदक वृद्धि व खिलाड़ियों को होने वाले संभावित फायदों के बारे में जानकारी दी गई है। हालांकि अभी इसका जवाब नहीं आया है।

कृषि विज्ञान केंद्र के जिला समन्वयक आईएस तोमर का कहना है कि ओलिंपिक में कम पदक मिलने से सभी को बहुत चिंता हुई थी। यहां की कड़कनाथ प्रजाति के बारे में प्रस्ताव ओलिंपिक संघ को भेजा गया। खिलाड़ियों के लिए यहां से कड़कनाथ मुर्गे भेजने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

भरपूर विटामिन-प्रोटीन

बताया गया है कि कड़कनाथ मुर्गे में विटामिन और प्रोटीन काफी मात्रा में होता है। इससे खिलाड़ियों को निश्चित रूप से फायदा होगा। उनकी शारीरिक क्षमता बढ़ सकती है। ओलिंपिक में क्वालीफाय करने वाले खिलाड़ियों को यह डाइट दी जाए तो उनका प्रदर्शन सुधर सकता है।

दुर्लभ प्रजाति

दुर्लभ प्रजाति का कड़कनाथ झाबुआ क्षेत्र में ही पाया जाता है। स्याह काले रंग के इस मुर्गे का अंडा, रक्त और मांस भी काला होता है। इसकी तासीर गर्म होती है, इससे यह शरीर को गर्म रख पाता है। सर्दी में इसकी अधिक मांग रहती है। झाबुआ में 80 के दशक से सरकार ने इसके संरक्षण का कार्यक्रम आरंभ किया।

एक संरक्षण केंद्र भी स्थापित किया गया है। दूर-दूर से लोग इसे लेने आते हैं। झाबुआ के केंद्र पर हर माह 6 से 7 हजार कड़कनाथ चूजों का उत्पादन किया जा रहा है। अब आसपास के जिलों में भी इस प्रजाति को बढ़ावा दिए जाने के प्रयास हो रहे हैं।

खिलाड़ियों को फायदा होगा

कड़कनाथ केंद्र के प्रभारी डॉ. जीएस दिवाकर का कहना है कि आयरन कड़कनाथ मुर्गे में सबसे अधिक होता है। इसीलिए उसका रंग, खून, मांस, हड्डियां व अंडे काले रंग के होते है। यह आसानी से पचता है। यहां इस दुर्लभ प्रजाति का संरक्षण किया जा रहा है।

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