सर से पांव तक सभी का समान महत्व

शरीर में मुख से लेकर चरण तक सभी का समान महत्व है। जो इंसान किसी जाति को उत्कृष्ट या निकृष्ट बताता है, वह उतना ही नासमझ है, जितना वर्ण व्यवस्था को गलत बताते हुए शास्त्र, आचार्यों और भगवान की निंदा करने वाला। वर्ण व्यवस्था किसी भी देश या काल में समान रूप से देखने को मिलती है, क्योंकि यह गुण और कर्म पर आधारित है। यह बात वेदांत आश्रम के स्वामी आत्मानंद सरस्वती ने कहीं। वे हिन्दी साहित्य समिति सभागार में गीता के चौथे अध्याय की व्याख्या कर रहे थे।

लोभी इंसान पशु समान

पाप का मूल लोभ और लोभ का मूल अहंकार है। अहंकार मनुष्य को अंधा बना देता है, जबकि लोभ में घिरा व्यक्ति पशु तुल्य हो जाता है। दया धर्म की और अभिमान पाप की जड़ है। मानव जीवन दुर्लभ माना गया है, इसलिए अपना जन्म सार्थक बनाने के लिए अहंकार का विसर्जन और सौजन्य का सृजन जरूरी है।

यह बात वृंदावन के भागवताचार्य पं. कृष्णकांत शास्त्री ने संगम नगर में कही। वे भारद्वाज ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में बोल रहे थे। आचार्य पं. रामचंद्र शर्मा वैदिक, पं. नंदकिशोर शर्मा, डॉ. नारायणदत्त शास्त्री, मुकेश पांडे, प्रभात गुप्ता, शंकर अवस्थी, सत्यनारायण मालवीय ने व्यासपीठ का पूजन किया। संयोजक पं. रजत शर्मा एवं पं. संतोष शर्मा के अनुसार 28 दिसंबर को दोपहर 2 से शाम शाम 6 बजे तक रामचरित्र, श्रीकृष्ण जन्म तथा नंदोत्सव मनाया जाएगा।

लोभी होता पशु समान

अहंकार मनुष्य को अंधा बना देता है, जबकि लोभ में घिरा व्यक्ति पशु तुल्य हो जाता है। दया धर्म की और अभिमान पाप की जड़ है। मानव जीवन दुर्लभ माना गया है, इसलिए अपना जन्म सार्थक बनाने के लिए अहंकार का विसर्जन और सौजन्य का सृजन जरूरी है। काम-क्रोध और राग-द्वेष जैसे विकार मनुष्य को जब-तब भटकाते रहते हैं, इनसे बचकर रहना ही मानवता का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए।

उक्त विचार भागवताचार्य जनार्दन वैष्णव ने मंगलवार को संगम नगर स्थित श्रीराम वाटिका के पास चल रहे भागवत ज्ञानयज्ञ में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान से बड़ा कोई नहीं हो सकता। यह जानते हुए भी हम संसार में रहते हुए स्वयं को इतना बड़ा मान लेते हैं कि भगवान की परम सत्ता को भी चुनौती देने लगते हैं। अहंकार इसका मूल कारण है। मनुष्य को सबसे बडा खतरा अहंकार से ही है। अहंकार कई रास्तों से घुसपैठ बना लेता है। रावण और कंस का हश्र अहंकार के कारण ही हुआ। अहंकारी व्यक्ति उस अंधे के समान हो जाता है, जो आंखे होते हुए भी अपने विवेक का प्रयोग नहीं करता। व्यासपीठ का पूजन पार्षद चंदा वाजपेयी, सुरेंद्र वाजपेयी, वल्लभ पांचाल, गोवर्धनलाल दग्दी, घनश्याम वैष्णव, सुबोध शुक्ला, विष्णु चौहान आदि ने किया। संयोजक योगेंद्र महंत और दिलीप परमार के अनुसार कथा प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक होगी। ज्ञातव्य है कि क्षेत्र में पहली बार 15 कॉलोनियों के श्रद्धालुओं द्वारा श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
कांधे पर झोला, हाथों में भिक्षा पात्र, मुख पर जय-जय रघुवीर समर्थ
स्वामी समर्थ पादुका दर्शन महोत्सव में निकली भिक्षा फेरी, गाए भजन

छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु समर्थ रामदास स्वामी की चरण पादुकाओं के दर्शन के लिए शनिवार को समर्थ मठ संस्थान, रामबाग पर भक्तों का मेला लगा। विभिन्ना धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह कांकड़ आरती, अभिषेक के बाद विभिन्ना क्षेत्रों में भिक्षा मांगी गई।

भिक्षा फेरी में पारंपरिक वेषभूषा में जय-जय रघुवीर समर्थ का जयघोष लगाते हाथ में भिक्षा पात्र और झोली लेकर समाजजन चल रहे थे। भिक्षार्थी पंतवैद्य कॉलोनी, स्नेहलतागंज, बक्षीबाग, नारायणबाग आदि क्षेत्रों में घूमें। दोपहर में विभिन्ना भजन मंडलियों द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी गई। शाम को हुई प्रार्थना में करुणाष्टक व मनोबोध किया गया। स्वामी समर्थ की पादुकाओं और भगवान राम का पुष्प श्रृंगार किया गया।

सजी भक्ति संगीत की महफिल

शाम को भक्ति संगीत की महफिल सजी। जयपुर के अत्रोली घराने की गायिका भाविका ताई भिडे व संजय शेडे एवं विकास कसलाकर की शिष्य संपदा विपट माणके (पुणे) का गायन हुआ। त्रिताल में बंध रचना ‘हारे मन काहे को’ की प्रस्तुति दी गई। ठुमरी और राग ललिता गौरी में रचनाओं की प्रस्तुति दी गई। आयोजन शास्त्रीय गायन, भक्ति संगीत से होते हुए राग भैरवी पर समाप्त हुआ। संस्थान के अध्यक्ष अशोक पाटणकर एवं डॉ. नितिन शुक्ल ने बताया कि रविवार को सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक भिक्षाफेरी जती कॉलोनी, गणेश कॉलोनी, तिलकपथ, जूना तुकोगंज, मार्तंड चौक का भ्रमण करेगी। -नप्र

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