जेल के सुरक्षाओं पर उठे सवाल, स्टाफ और उपकरण की कमी

देहरादून:  प्रदेश में जेलों की सुरक्षा को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच स्थिति बहुत बेहतर नहीं हो पाई है। जेलों को अभी तक सुरक्षित नहीं बनाया जा सका है। स्थिति यह है कि पैसा स्वीकृत होने के आठ माह बाद भी सीसी कैमरों की खरीद नहीं हो पाई है।
जेलों में बंदीरक्षकों के पदों पर अभी तक भर्ती प्रक्रिया संपन्न नहीं हो पाई है। जेलों में डिप्टी जेलर के पद तकरीबन खाली है। चुनिंदा पदों पर प्रधान बंदीरक्षक ही यह जिम्मा संभाले हुए हैं। यहां तक कि जेलों की सुरक्षा भी बाबा आदम के जमानों के हथियार से ही हो रही है।
उत्तराखंड में 11 जेल और दो उप जेल हैं। इन जेलों में उत्तराखंड समेत दूसरे राज्यों के गंभीर श्रेणी के अपराधी कैद हैं। जेलों की सुरक्षा पर काफी पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
इस तरह के कई मामले सामने आए हैं जिनमें इस बात की पुष्टि हुई है कि अपराधी जेलों के भीतर से ही अपना नेटवर्क संचालित करते थे। रुड़की जेल के बाहर दो गुटों के बीच गोलीबारी की घटना में भी जेल प्रशासन की लापरवाही सामने आई थी। इसके कुछ समय बाद पुलिस अभिरक्षा से अमित भूरा की फरारी से जेलों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे थे।

इस दौरान की गई जांच में यह बात सामने आई थी कि फरारी की योजना का पूरा ताना बाना जेल के भीतर बैठ कर ही बुना गया। यही कारण भी रहा कि जेल प्रशासन को प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से हटा कर पुलिस अधिकारियों को सौंपा गया। बावजूद इसके व्यवस्था में बहुत अधिक सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। बीते दिनों की रंगदारी की एक घटना में जेलर के फोन का इस्तेमाल होने की बात सामने आई है।

एक साल से नहीं खरीदे गए सीसी कैमरे
जेलों को सुरक्षित बनाने के लिए तकरीबन डेढ़ वर्ष पूर्व सीसी कैमरे खरीदे जाने का निर्णय लिया गया था। गत वर्ष इसके लिए कंटीजेंसी मद से दो करोड़ रुपये स्वीकृत किया गया था लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते इनकी खरीद नहीं हो पाई। नतीजतन यह पैसा वापस चला गया। इस वर्ष भी कैमरों की खरीद के लिए एक करोड़ का प्रावधान किया गया है लेकिन अभी तक यह खरीद नहीं हो पाई है।

बंदीरक्षकों के पूरे पदों पर भर्ती नहीं
जेलों में बंदीरक्षकों के तकरीबन 480 पद हैं। इनमें विभाग ने केवल 400 पदों पर ही भर्ती प्रक्रिया कराई है। दरअसल, जेलों की सुरक्षा में 80 सुरक्षा कर्मी बाह्य स्रोत से तैनात किए गए हैं। सभी पदों पर भर्ती होने की सूरत में यह लोग बाहर हो सकते हैं। इसे देखते हुए विभाग ने इन पदों के सापेक्ष नई नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं किया।

पदोन्नति भी रुकी
जेलों में इस समय डिप्टी जेल के 11 पद विभागीय पदोन्नति और सीधी भर्ती के 33 पद हैं। इनमें से अधिकांश पद रिक्त हैं। विभागीय पदोन्नति के सात पदों पर भी प्रधान बंदीरक्षकों को प्रभार दिया गया है। विभागीय नीति बनने के बावजूद विभागीय पदोन्नति नहीं हो पा रही है। इसी प्रकार प्रधान बंदी रक्षक के रिक्त पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया अभी लंबित है।

कैमरे खरीदने की प्रक्रिया शुरू
महानिरीक्षक जेल पीवीके प्रसाद के मुताबिक सीसी कैमरों की खरीद की प्रक्रिया की जा रही है। जनवरी अंत तक कैमरे ले लिए जाएंगे। बंदी रक्षकों का भी दस दिनों के भीतर परिणाम आ जाएगा। विभाग में पदोन्नति पहले हो चुकी है।
जेलों की सुरक्षा बढ़ाने के दिए गए निर्देश
पंजाब में जेल में घुस कर आतंकियों को फरार कराने की घटना के बाद उत्तराखंड में जेलों की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। डीजीपी एमए गणपति के आदेश के बाद आइजी जेल पीवीके प्रसाद ने सभी जेलों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं।

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