हवाई कंपनियों का कारोबार सातवें आसमान पर

रुद्रप्रयाग: विश्व प्रसिद्ध धाम केदारनाथ के कपाट भले ही बंद हो गए है, मगर हवाई सेवा देने वाली कंपनियां इस साल हुए मुनाफे से आह्लादित है। इस साल 91 हजार पांच सौ यात्रियों ने हवाई सेवा से बाबा केदार के दर्शन किए। साथ ही 62 करोड़ से अधिक का कारोबार किया।
वर्ष 2013 से पूर्व से हवाई कंपनियां केदारनाथ के लिए सेवाएं दे रही है। मगर आपदा के बाद से अधिकांश यात्री पैदल मार्गो पर खतरे की आशंका से हवाई सफर करना ज्यादा मुफीद समझ रहे है।
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वर्ष 2003 में सर्वप्रथम अगस्त्यमुनि से केदारनाथ के लिए पवनहंस हवाई कंपनी ने उड़ान शुरू की थी। कंपनी ने यहा से तीन साल तक सेवा दी। इसके बाद वर्ष 2006 से केदारनाथ के लिए फाटा, गुप्तकाशी, शेरसी, नाला और सोनप्रयाग से भी सेवा देना शुरू किया।
मगर केदारनाथ आपदा के बाद से हवाई कंपनियो ने बड़ी तादाद मे घाटी की ओर रूख किया। इस वर्ष 13 हवाई कंपनियो को शासन एवं डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की केदारनाथ के लिए उड़ान भरने की अनुमति मिली थी।
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इसमें पवनहंस, यूटीआर, पिनैकल, हिमालयन हेली, ग्लोबल वैक्ट्रा, हेरिटेज, ऐरो एविएशन, आर्यन, ट्रांस भारत, गोदावत एविएशन, सुमित एविएशन समेत कई कंपनियां शामिल थी। बीत नौ मई को केदारनाथ के कपाट खुलने से लेकर अब तक 308723 यात्रियों ने धाम के दर्शन किए। इनमें से 91405 यात्रियों ने हेलीकॉप्टर से बाबा केदार के दर्शन किए।
जबकि पिछले साल की बात करे तो 2015 मे कुल 154430 यात्री बाबा केदारनाथ के दर्शनों को पहुंचे। इनमें से 71192 यात्रियों ने हेली सेवा से धाम पहुंAdd Newचे और 42 करोड़ रुपये का कारोबार किया। गौरीकुंड से पैदल जाने के बजाय यात्री हवाई सेवा से ही जाना पसंद कर रहे है।
ट्रांसभारत हवाई कंपनी के एमडी कैप्टन पीके छावड़ी ने बताया कि हवाई सेवाओ के प्रति श्रद्धालुओ का रूझान काफी बढ़ गया है। हवाई कंपनियां भी बड़ी संख्या मे केदारनाथ के लिए हवाई उड़ान भरने के लिए आवेदन कर रही है।

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