कट्टरवादी महिलाओं का संगठन शाहीन फोर्स ये है ज्यादा खतरनाक

सिमी के स्लीपर सेल ज्यादा खतरनाक हैं। इनका एनकाउंटर पुलिस की सफलता मानी जा सकती है। सिमी के सरगना चाहे जेल में हो, परंतु ये स्लीपर सेल नाम बदल-बदल कर छोटे कस्बाई क्षेत्रों को अब टारगेट कर रहे हैं। साथ ही शाहीन फोर्स (कट्टरवादी महिलाओं का संगठन) पर निगाहें रखना जरूरी है।

यह बात विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मदीप अलूने (उज्जैन) ने कही। उन्होंने आतंकवाद का भारत में प्रसार और राज्य सक्षमता जैसे चुनौतीपूर्ण विषय पर शोध किया है। मंगलवार को उन्होंने नईदुनिया से विशेष चर्चा में कहा कि ग्रामीण क्षेत्र इन दिनों सिमी कार्यकर्ताओं के टारगेट पर हैं। भोपाल जेल ब्रेक को उन्होंने आतंकियों का प्लान ए बताया।

उन्हें आशंका है कि जेल में बंद सरगनाओं का प्लान बी और सी भी होगा। उन्होंने पुलिस प्रबंधन को सचेत किया कि इस एनकाउंटर उपलब्धि को मिशन का अंत नहीं मानना चाहिए। ये स्लीपर सेल अप्रत्यक्ष रूप से कट्टरवाद की नई पीढ़ी को तैयार करने में जुटे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि आगामी दक्षिण भारत और अन्य राज्यों के चुनाव में ये मारे गए आतंकी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते थे।

शाहीन फोर्स यानी कट्टरवाद

डॉ. अलूने ने शाहीन फोर्स संगठन को समाज के लिए खतरनाक बताया। शोध में उन्होंने पाया कि शाहीन फोर्स अंतर्गत कट्टरवादी मानसिकता से जुड़ी महिलाएं नई युवतियों को जोड़ती हैं। प्रयास रहता है कि सिमी कार्यकर्ताओं की शादी इसी संगठन से जुड़ी युवतियों से हो।

उज्जैन संभाग के ही 16 प्रकरणों के अध्ययन में पाया गया कि शादी के बाद कई सिमी आतंकी समाज की मुख्यधारा में जुड़े। ऐसे में संगठन का प्रयास कट्टरवाद से जुड़ी महिलाओं से ही शादी करवाना है। उल्लेखनीय है कि डॉ. अलूने पुलिस प्रबंधन में सिमी कार्यकर्ताओं की गतिविधियों और आशंकाओं के मद्देनजर सेमिनार में विचार रख चुके हैं।

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