दोषियों की रिहाई को लेकर बिलकिस बानो ने दाखिल की रिव्यू पिटीशन

बिलकिस बानो की ओर से ये कहा गया है कि इस मामले में रिहाई की नीति गुजरात की नहीं बल्कि महाराष्ट्र की लागू की जानी चाहिए क्योंकि महाराष्ट्र में ही ये मामला सुना गया और सजा भी यहीं सुनाई गयी थी। बिलकिस बानो ने एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और दोषियों की समय से पहले रिहाई को लेकर बिलकिस बानो ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर दिया है। बिलकिस ने शीर्ष अदालत के मई में दिए आदेश के खिलाफ दुबारा विचार याचिका दाखिल की है। जिसमें दोषियों की रिहाई का फैसला गुजरात सरकार पर छोड़ा था।

फिर गुजरात सरकार ने दोषियों को रिहा कर दिया था। बिलकिस ने सभी को फिर से जेल भेजने की मांग की है। बिलकिस की ओर से ये कहा गया है कि इस मामले में रिहाई की नीति गुजरात की नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की लागू की चाहिए, क्योंकि महाराष्ट्र में ही यह मामला सुना गया और सजा भी यहीं सुनाई गई थी। वहीं, बिलकिस बानों ने सभी दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की है।

आपको बता दें कि गुजरात सरकार की ओर से सजा माफी नीति के तहत सभी 11 दोषियों की रिहाई की इजाजत दे दी गई थी, जिसके बाद दोषियों को इस साल 15 अगस्त को रिहा कर दिया गया था। इन दोषियों ने जेल में 15 साल से अधिक समय बिताया। मुंबई की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 21 जनवरी 2008 को सभी 11 दोषियों को गैंगरेप और बिलकिस बानो के परिवार के सात सदस्यों की हत्या के आरोप में उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को मुंबई हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। बात गौर करने वाली है कि गुजरात में 2002 के दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप किया गया था। उस वक्त वह 21 वर्ष की थीं और वह पांच महीने की गर्भवती भी थीं। बिलकिस बानो के परिवार के मारे गए सात सदस्यों में उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी।

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