गोरखालैण्ड को नेपाल का समर्थन नहीं,IFWJ प्रतिनिधि मंडल से मिले नेपाल के प्रधानमंत्री

 

नई दिल्ली: 28 जून: नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने पड़ोसी दार्जिंलिंग पर्वतक्षेत्र में तेजी पकड़ रहे गोरखालैण्ड आन्दोलन को भारत का अन्दरूनी मसला बताया। नेपाल को इससे दूर रखते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी इसे हल कर सकते हैं। श्री देउबा अपने काठमाण्डो कार्यालय में इण्डियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (आई.एफ.डब्लू.जे.) के एक प्रतिनिधि मंडल से बात कर रहे थे। IFWJ अध्यक्ष के. विक्रम राव नेतृत्व में गत सप्ताह इस हिमालयी गणराज्य के अध्ययन यात्रा पर दस दिनों से था।
प्रधानमंत्री देउबा की टिप्पणी उस संदर्भ में थी कि गोरखा जनमुक्ति मोरचा के नेता विमल गुरूंग ने पृथक राज्य के लिए नस्ली आधार पर समर्थन जुटाने का प्रयास किया है। पड़ोसी प्रदेश सिक्किम के गत पच्चीस वर्षों से पदासीन मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने अपने दल सिक्किम जनवादी मोर्चा का पूर्ण समर्थन अलग गोरखा प्रदेश की मांग को दिया है। नेपाल की मीडिया में भारतीय श्रमजीवी पत्रकारों को गोरखालैण्ड हेतु समर्थन दिखा है। इसी संदर्भ में के. विक्रम राव द्वारा प्रश्न पूछा गया था कि चूंकि गोरखा जन भी नेपाल मूल के है अतः नेपाल का क्या रुख है, प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने अपनी वैचारिक दूरी स्पष्ट दर्शिते हुये कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। भारतीय पत्रकारों में पृथक बने प्रदेशों (झारखण्ड,तेलंगाना आदि) के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ की विभीशिका रोकने पर पूछे गये प्रश्न के उत्तर में श्री देउबा ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रेरक पहल करे तो नेपाल तत्पर है। कई नदियां जिनका उद्गम स्थल नेपाल में है उफान के कारण ही पूर्वांचल में रौद्र रूप लेती हैं।
भारतीय पत्रकारों की इस नेपाल यात्रा के शीर्षक “विष्वनाथ से पशुपतिनाथ बरास्ते गोरखनाथ” की प्रशंसा करते हुये नेपाली प्रधानमंत्री ने दक्षिण भारत के तीर्थस्थल तिरूपति तथा पशुपति (काठमाण्डो) के यात्रियों हेतु संयुक्त रूप से सामीप्य बढ़ाने तथा बेहतर सुविधा दिलाने का आग्रह किया। नेपाल की समकालीन परिस्थिति पर पूछे जाने पर श्री देउबा ने कहा कि गत पखवाड़े में हुये सत्ता परिवर्तन का शान्तिमय रूप से होना दर्शाता है कि नेपाल में लोकतंत्र की जड़े गहराई है। तत्कालीन माओवादी प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ”प्रचण्ड, ने त्यागपत्र देकर श्री देउबा को प्रधानमंत्री हेतु समर्थन दिया। माओवादियों तथा नेपाली कांग्रेस में समझौते के तहत प्रधानमंत्री पद को दोनों को एक अवधि के अनुसार देना था।
देउबा ने भारतीय पत्रकारों से अनुरोध किया कि वे दोनों पड़ोसी राष्ट्रों के रिश्तों पर संवेदनशीलता से लिखें।
नेपाल में महिलाओं की दशा पर प्रधानमंत्री ने बताया कि आजकल हो रहे पंचायत निर्वाचन में एक तिहाई पद महिलाओं हेतु आरक्षित है। महापौर और उपमहापौर में एक पद महिलाओं को मिलता है। नेपाल की राष्ट्रपति श्रीमती विद्या देवी भण्डारी हैं।
इण्डियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के इस दल ने फेडरेशन ऑफ नेपाली जर्नलिस्टों से भी परस्पर हितों की चर्चा की। वे सब लुम्बिनी, पोखरा, मनोकामना आदि भी गये।

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