कोरोना पर जीत के लिए सकारात्मक सोच को अनिवार्य मानते हैं मोहन भागवत

कृष्णमोहन झा/

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर पहली लहर से भी अधिक भयावह रही है। पिछले दिनों प्रतिदिन चार लाख से अधिक लोग इस जानलेवा वायरस के संक्रमण की चपेट में आ रहे थे और यह निःसंदेह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनमें से हजारों संक्रमितों की प्राण रक्षा नहीं की जा सकी  । हजारों परिवारों में आज यह स्थिति है कि उनके पास जीवन यापन का कोई जरिया नहीं है क्योंकि जिन लोगों के कंधों पर  परिवार जनों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी थी उन्हें ही कोरोना ने मौत की नींद सुला दिया है। सामाजिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है । कोरोना वायरस के इस भयावह प्रकोप के कारण लोगों के मन में गहन नैराश्य की जो  भावना घर कर गई है उससे जल्दी उबर पाना आसान नहीं है। इस समय लोगों को इस  निराशा के घेरे से बाहर निकाल कर उन्हें जीवन को नए  सिरे से जीने के लिए प्रेरित करने की सर्वोपरि आवश्यकता है ।

इसी पुनीत भावना से एक सराहनीय पहल की शुरुआत कोविड  रिस्पांस  टीम ने की है‌ जिसके द्वारा  विगत 11मई  से 15 मई तक “पाजिटिविटी अनलिमिटेड” व्याख्यान माला का आयोजन किया  गया था।इस व्याख्यान माला में अपने विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित  विभिन्न क्षेत्रों की शीर्ष विभूतियों का यही मत था  कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर से उपजी विषम परिस्थितियों में हमें  हर हाल में अपने धैर्य ,संयम  और साहस को बनाए रखना है। अपनी संकल्प शक्ति,सतत प्रयास , धैर्य और एकजुटता के बल पर हम इस  कठिन चुनौती को परास्त कर एक नयी शुरुआत करने में अवश्य सफल होंगे।  इस 6 दिवसीय व्याख्यान माला का समापन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के सारगर्भित प्रेरक उदबोधन  से हुआ। कोरोना के भीषण आपदाकाल में उन्होंने  सकारात्मक  सोच की अनिवार्यता प्रतिपादित करते हुए कहा कि इस समय हमें नकारात्मक विचारों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना है।

कोरोना के विरुद्ध जारी लड़ाई हमें  एकजुट होकर लड़नी होगी।इस कठिन चुनौती का सामना हम सबको एक टीम के रूप में करना है। यह समय एक दूसरे पर दोषारोपण ‌करने का नहीं है। मोहन भागवत ने कहा कि अतीत में हमने ऐसी विपदाओं का सामना दृढ़ता पूर्वक  करते हुए उन पर जीत हासिल की है । यह आपदा भी कितनी ही बड़ी क्यों न हो , आखरी जीत हमारी ही होगी। संकट काल में ही हमारे सद्गुणों की परीक्षा  होती है और हमारी गलतियों का अहसास होता है। कोरोना की दूसरी लहर हमारी लापरवाही का नतीजा है । भागवत ‌ने इस स्थिति के  लिए समाज और सरकार दोनों को  जिम्मेदार बताते हुए कहा कि हमारे चिकित्सा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने हमें दूसरी लहर के खतरे के प्रति पहले ही आगाह किया था परंतु पहली लहर के कमजोर पड़ते ही हमने लापरवाही बरतना शुरू कर दिया जिसका नतीजा सामने है। सरसंघचालक ने कहा कि अब हमें सजग रहने की आवश्यकता है।              

गौरतलब है कि देश में  कोरोना वायरस की पहली लहर आने के बाद गत वर्ष भी मई में सरसंघचालक ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ऐसा ही प्रेरक उद्बोधन दिया था जिसमें उन्होंने लाक डाउन की पाबंदियों का निष्ठापूर्वक पालन किए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा था कि हमें लाक डाउन के दौरान घरों के अंदर रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना है।  कोविड रिस्पांस टीम द्वारा आयोजित पाजिटिविटी अनलिमिटेड व्याख्यान माला में भी मोहन भागवत ने पुनः इस बात पर ज़ोर दिया कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर की चुनौती से निपटने के लिए हमें उसी तरह अनुशासन का परिचय देना होगा। भागवत ने कहा कि भयावह कोरोना  संकट के कारण ‌लोगों के मन में नैराश्य की भावना घर कर गई है  इसलिए उन्हें इस निराशा के घेरे से बाहर निकालने के लिए जनप्रबोधन, जनजागरण और जनप्रशिक्षण का अभियान चलाने की आवश्यकता है।

इसमें पाजिविटी अनलिमिटेड व्याख्यान माला जैसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरसंघचालक ने कहा कि अब  निराशा के घेरे से बाहर निकल कर अपने शरीर को कोरोना नेगेटिव रखते हुए मन को पाज़िटिव बनाने की आवश्यकता है । लोगों को अपनी   सोच  को सकारात्मक बनाने के लिए ऐसे आयोजनों से प्रेरणा मिलती है। सरसंघचालक ने कहा कि हमें कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु अधिकांश समय  घर के अंदर ही गुजारना है अतः जो खाली समय हमें मिला है उसका सदुपयोग हम कुछ नया सीखने में कर सकते हैं। सरसंघचालक ने प्राणायाम जैसे व्यायामों को कोरोना संक्रमण से बचाव में उपयोगी बताते हुए उन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करने का भी लोगों से अनुरोध किया।सरसंघचालक ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर के बारे में जो आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं उनसे हमें घबराने की आवश्यकता नहीं है ।  जिस तरह  हमने अपनी संकल्प शक्ति, धैर्य,संयम और साहस के बल पर कोरोना की पहली और दूसरी लहर का सामना किया है उसी तरह  हम तीसरी लहर का भी सामना करने के लिए तैयार रहना है।

हमसे पहले  जो गलतियां हो चुकी हैं उन गलतियों से बचना होगा।सरसंघचालक ने कहा कि हमारे देश ने पहले भी ऐसी आपदाओं का सामना किया है और उन पर जीत हासिल की है। मोहन भागवत ने एक प्रसिद्ध शेर का उल्लेख करते हुए कहा कि “कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।” कोविड रिस्पांस टीम के तत्वावधान में आयोजित इस जनजागरण के आयोजन का देश के सौ से अधिक मीडिया प्लेटफॉर्म से सीधा प्रसारण किया। इसमें आमंत्रित विभिन्न क्षेत्रों की  दिग्गज विभूतियों को अपने विचार व्यक्त करने के आमंत्रित किया गया था और सभी की  एक ही राय थी कि हम अपनी संकल्प शक्ति, धैर्य,संयम और साहस के बल पर इस  संकट पर विजय पाने में सफल होंगे ।

(लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना  मीडिया समूह के सलाहकार है)

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