अखिलेश और शिवपाल के नजदीक होने से प्रसपा नेता बैचेन

यह समाजवादी पार्टी के उस समय के दृश्य हैं,जब पूरा परिवार “मुखिया मुलायम सिंह यादव” का सम्मान करता था l वक्त ने पासा पलटा और “समाजवादी परिवार” में फूट पड़ गई l इस फूट की धुरी थे,”अखिलेश यादव” l जब तक पिता “मुलायम” जिंदा थे,”अखिलेश” की ना तो “मुलायम” से बनी और ना ही तो चाचा “शिवपाल सिंह यादव” से l फिलहाल अब “धरती पुत्र मुलायम” इस दुनिया में नहीं है और “मैनपुरी” में “उपचुनाव” हो रहा है l “डिंपल यादव” चुनावी मैदान में है,शिवपाल डिंपल का सपोर्ट करते दिख रहे हैं, सार्वजनिक तौर पर अखिलेश और शिवपाल की ताकत भी देखी जा रही है,लेकिन जिस तरीके से “समाजवादी पार्टी” और “प्रगतिशील समाजवादी पार्टी” के बीच नजदीकियां बढ़ रही है,ऐसे में “प्रसपा” के तमाम नेताओं को अंदर ही अंदर अपने वजूद को बचाए रखना की चिंता सता रही है l भले ही वक्त ने “शिवपाल” “अखिलेश” को एक साथ ला दिया हो,क्योंकि मैनपुरी में उपचुनाव होने हैं l ऐसे में दोनों ताकतों का एक होना सियासी मजबूरी भी है,लेकिन प्रसपा के वजूद की बात की जाए तो,”अखिलेश” से अलग होने के बाद तमाम दिग्गज नेता अलग-अलग दलों में शामिल हो गए थे l मंत्री शादाब फातिमा बसपा में चली गई तो वहीं अभिषेक सिंह आशु ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया ,जो “रहे-सहे” “प्रसपा” के दिग्गज नेता बचे हैं,अब उनको लग रहा है कि, उपचुनाव के बाद अगर “मुलायम” और “अखिलेश” एक ही रहते हैं, तो ऐसे में “प्रगतिशील समाज पार्टी” से जुड़े नेताओं का भविष्य क्या होगा?उन लोगों को चिंता यह भी सता रही है,कि खुद “शिवपाल सिंह” “समाजवादी पार्टी” से जुड़ जाते हैं तो उनका सम्मान कितना होगा ? और अगर उनके नेता का सम्मान नहीं हुआ तो उनका भी हाशिए पर आना है तय है ? ऐसे में बीजेपी नेता “केशव प्रसाद मौर्य” ने दोनों की बढ़ती नज़दीकियों पर चुटकी ली l”केशव प्रसाद मौर्य” ने कहा की उपचुनाव के बाद भी “चाचा-भतीजे” एक रहे,तो बेहतर है ,लेकिन यह सिर्फ एक परिकल्पना लग रहा है l फिलहाल मेरा समाजवादी पार्टी से कोई “लेना-देना” नहीं है और ना ही तो “चाचा-भतीजे” का संबंध बीजेपी से है l भले ही “केशव प्रसाद मौर्य” ने जुबान से “इशारों-इशारों” में सपा और शिवपाल को आड़े हाथों लिया हो, लेकिन कहीं ना कहीं उनकी बातों में दम भी लग रहा है,क्योंकि जिस तरह से “अखिलेश” और “शिवपाल” का विवाद लंबे अंतराल तक चला l उसे देखकर आगे का भविष्य क्या होगा ?इसका अंदाजा लगाना कठिन है lफिलहाल “मैनपुरी उपचुनाव” में “डिंपल यादव” को लेकर “अखिलेश” और “शिवपाल” संजीदा दिख रहे हो,लेकिन “प्रगतिशील समाजवादी पार्टी” के नेताओं का डर बढ़ता ही जा रहा है l ऐसे में चुनाव के बाद तस्वीर क्या बनती है ? यह कह पाना फ़िलहाल बेहद मुश्किल दिख रहा है|

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