लॉरेंस बिश्नोई का जन्म 1993 में पंजाब के फाजिल्का जिले में हुआ, शुरुआती पढ़ाई के बाद वह चंडीगढ़ पहुंचा जहां छात्र राजनीति के दौरान उसका नाम पहली बार आपराधिक मामलों में सामने आया। पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामलों से शुरू हुआ सफर आगे चलकर संगठित अपराध तक पहुंचा, समय के साथ उसके आसपास एक ऐसा नेटवर्क तैयार हुआ, जिसे बाद में बिश्नोई गैंग के रूप में उसे लोग जानने लगे।
इस नेटवर्क में गोल्डी बराड़ का नाम सबसे प्रमुख सहयोगियों में माना जाता है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि लॉरेंस के जेल में रहने के दौरान भी विदेश से गैंग के कथित संचालन और संपर्क बनाए रखने में गोल्डी बराड़ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद उसका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया उसी के बाद लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ हत्या, हत्या की साजिश, रंगदारी, अवैध हथियार और संगठित अपराध जैसे कई मामलों में FIR दर्ज हुई , कई मामलों में जांच जारी है, कई में ट्रायल चल रहा है और कुछ में अदालतें फैसला सुना चुकी हैं।
बीते कुछ वर्षों में सलमान खान, आमिर खान , गिप्पी ग्रेवाल, AP ढिल्लों और अन्य चर्चित नामों से जुड़े मामलों में भी बिश्नोई गैंग का नाम जांच के दौरान सामने आया, इसी तरह व्यापारियों और स्थानीय नेताओं को कथित रंगदारी कॉल मिलने के मामलों की भी विभिन्न एजेंसियों ने जांच की, हर मामले में कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग चल रही है |
हाल के समय में अभिनेता आमिर खान को भी बिश्नोई गैंग के नाम से कथित धमकी भरे ऑडियो संदेश और सोशल मीडिया संदेश मिलने की खबरें सामने आईं।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरफ से आरजू बिश्नोई और टायसन बिश्नोई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट और ऑडियो शेयर करके आमिर खान को धमकी दी है
पोस्ट में लिखा है- जय श्री राम, जय सीता राम. मैं आरजू बिश्नोई और टायसन बिश्नोई जो ये जो हमारी संस्कृति के खिलाफ हमारे देश में लव जिहाद के नाम पर आमिर खान जैसे लोग इसे बढ़ावा दे रहे हैं, हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसका जवाब बहुत जल्द इसको दिया जाएगा. ये चीज हमारे सनातन धर्म में और देश के खिलाफ है.
'हमारा, हमारे भाई-बहनों और देशवासियों से वादा है कि जो भी इस घटिया हरकत को बढ़ावा देगा, उसको हम अपने तरीके से जवाब देंगे ये जो स्टारडम के नाम पर इस चीज को बढ़ावा दे रहे हैं, इनकी हम सांसें दबा लेंगे.
जांच एजेंसियों का कहना है कि संगठित अपराध के कुछ नेटवर्क जेल के बाहर मौजूद सहयोगियों और विदेशों में बैठे संपर्कों के माध्यम से संचालित किए जाने के आरोपों की जांच के दायरे में रहे हैं। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सोशल मीडिया पर अपराधियों का महिमामंडन युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।





