कथित 550 करोड़ रुपये मूल्य की चांदी विवाद में अदालत ने जांच की प्रगति पर जताई गंभीरता, क्राइम ब्रांच से विस्तृत रिपोर्ट तलब; सभी अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का आदेश।
देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई कथित 550 करोड़ रुपये मूल्य की चांदी से जुड़े विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। जम्मू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने मामले की सुनवाई करते हुए क्राइम ब्रांच से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है और जांच से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने जांच अधिकारी को मामले से संबंधित रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का भी आदेश दिया है। मामला फिलहाल न्यायिक जांच के अधीन है और अदालत ने अभी तक आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद उस समय सामने आया जब मंदिर में वर्षों से श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई चांदी को परीक्षण, गलाने (Melting) और प्रोसेसिंग के लिए भेजा गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के दौरान चांदी की शुद्धता उम्मीद से बेहद कम पाई गई। शिकायत में दावा किया गया है कि लगभग 20 टन चांदी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 550 करोड़ रुपये बताई गई थी, उसकी जांच में केवल 5 से 6 प्रतिशत ही शुद्ध चांदी पाई गई, जबकि शेष धातु में कैडमियम, लोहा और अन्य धातुओं की मिलावट होने का आरोप है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरा मामला न्यायिक जांच के अधीन है।
याचिका में क्या लगाए गए आरोप?
याचिकाकर्ता का कहना है कि या तो श्रद्धालुओं को नकली या मिलावटी चांदी बेचकर मंदिर में चढ़वाई गई, या फिर मंदिर में जमा होने के बाद असली चांदी की कथित तौर पर अदला-बदली अथवा हेराफेरी की गई। इसी आशंका के आधार पर विस्तृत आपराधिक जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता दीपक शर्मा का आरोप है कि यह मामला केवल मिलावट तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसमें संभावित आपराधिक साजिश, विश्वासघात, रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ और हेराफेरी जैसे गंभीर पहलुओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अदालत ने क्यों दिखाई सख्ती?
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह दलील दी गई कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद जांच एजेंसी ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की है। शिकायतकर्ता ने कहा कि केवल शिकायत को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। इसके बाद सीजेएम ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर अब तक की जांच से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड या डिजिटल साक्ष्य को नष्ट या परिवर्तित नहीं किया जाना चाहिए।
किन-किन सबूतों को सुरक्षित रखने के निर्देश?
अदालत ने जांच एजेंसी को मंदिर के स्टॉक और इन्वेंट्री रजिस्टर, CCTV फुटेज, चांदी के संग्रह, भंडारण और परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड, डिस्पैच दस्तावेज, एसे (Assay) यानी शुद्धता जांच रिपोर्ट, मिंट (टकसाल) से संबंधित पत्राचार, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तथा चढ़ावे की प्राप्ति, परीक्षण और गलाने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत का कहना है कि भविष्य की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के लिए इन सभी साक्ष्यों का सुरक्षित रहना बेहद आवश्यक है।
क्राइम ब्रांच ने अदालत में क्या कहा?
क्राइम ब्रांच ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में अदालत को बताया कि शिकायत को आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है और प्रक्रिया जारी है। हालांकि शिकायतकर्ता ने अदालत में सवाल उठाया कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि क्या एफआईआर दर्ज की गई है, क्या प्राथमिक जांच शुरू हुई है, क्या किसी रिकॉर्ड को जब्त किया गया है, क्या CCTV फुटेज सुरक्षित की गई है, क्या गवाहों से पूछताछ हुई है और क्या किसी प्रकार की फोरेंसिक जांच शुरू की गई है। इन सवालों के बाद अदालत ने विस्तृत रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया।
550 करोड़ से 30 करोड़ का दावा कैसे जुड़ा?
शिकायत में दावा किया गया है कि लगभग 20 टन चांदी का अनुमानित मूल्य करीब 550 करोड़ रुपये था, लेकिन कथित शुद्धता परीक्षण के बाद उसकी वास्तविक कीमत लगभग 30 करोड़ रुपये रह गई। आरोप है कि ऐसा चांदी की शुद्धता बेहद कम पाए जाने के कारण हुआ। हालांकि इस दावे की अभी किसी स्वतंत्र एजेंसी से पुष्टि नहीं हुई है और इसका सत्यापन जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगा।
श्रद्धालुओं में बढ़ी चिंता, श्राइन बोर्ड ने शुरू की समीक्षा
वैष्णो देवी मंदिर देश के सबसे अधिक श्रद्धालुओं वाले धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु नकद, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं चढ़ाते हैं। ऐसे में इस तरह के आरोप सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उधर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने भी चढ़ावे के संग्रह, भंडारण और प्रबंधन व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। बोर्ड का कहना है कि दान प्रबंधन प्रणाली में पारदर्शिता और स्थापित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है।
आगे क्या होगा?
अब मामले की अगली सुनवाई में क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर विस्तृत रिकॉर्ड पेश करना होगा। अदालत इस बात की समीक्षा करेगी कि अब तक जांच में क्या प्रगति हुई है और क्या एफआईआर दर्ज करने अथवा आगे की आपराधिक जांच के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो यह देश के सबसे बड़े धार्मिक चढ़ावा प्रबंधन विवादों में से एक साबित हो सकता है, जबकि यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।





