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जनगणना 2027: बंगाल में 15 दिन की ऑनलाइन स्व-गणना शुरू

भारत की पहली डिजिटल जनगणना की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल में जनगणना 2027 के लिए Self-Enumeration (स्व-गणना) प्रक्रिया शुरू हो गई है। नागरिक 15 दिनों तक ऑनलाइन पोर्टल पर स्वयं अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 16 अगस्त से गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन और जनगणना का कार्य शुरू करेंगे। सरकार का कहना है कि इस डिजिटल प्रक्रिया से जनगणना अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक होगी।

India Junction News Desk
1/8/2026
जनगणना 2027: बंगाल में 15 दिन की ऑनलाइन स्व-गणना शुरू

भारत में जनगणना की प्रक्रिया अब पूरी तरह तकनीक आधारित होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में जनगणना 2027 के लिए पश्चिम बंगाल में स्व-गणना (Self-Enumeration) प्रक्रिया शनिवार, 1 अगस्त से शुरू हो गई है। यह प्रक्रिया अगले 15 दिनों, यानी 15 अगस्त तक जारी रहेगी। इसके बाद 16 अगस्त से राज्यभर में घर-घर जाकर जनगणना का पहला चरण शुरू किया जाएगा। यह पहली बार है जब भारत सरकार नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज करने का विकल्प दे रही है। सरकार का मानना है कि इससे जनगणना अधिक पारदर्शी, तेज, सटीक और डिजिटल बनेगी। साथ ही डेटा संग्रहण की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यवस्थित होगी।

भारत की पहली डिजिटल जनगणना की शुरुआत

भारत में अब तक हुई सभी जनगणनाएं मुख्य रूप से कागजी प्रक्रिया पर आधारित रही हैं। गणनाकर्मी घर-घर जाकर लोगों से जानकारी लेते थे और उसे फॉर्म में दर्ज करते थे। लेकिन जनगणना 2027 इस मायने में ऐतिहासिक होगी क्योंकि इसमें पहली बार बड़े पैमाने पर डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस नई प्रणाली में नागरिकों को यह सुविधा मिलेगी कि वे अपने मोबाइल फोन, टैबलेट या कंप्यूटर के माध्यम से आधिकारिक पोर्टल पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी भर सकें। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि आंकड़ों की शुद्धता भी बढ़ेगी।

सरकार का कहना है कि डिजिटल जनगणना से डेटा प्रोसेसिंग तेज होगी, कागज की खपत कम होगी और जानकारी को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जा सकेगा।

क्या है Self-Enumeration?

Self-Enumeration (स्व-गणना) एक ऑनलाइन सुविधा है जिसके माध्यम से परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य आधिकारिक पोर्टल पर लॉग-इन करके अपने परिवार की पूरी जानकारी स्वयं भर सकता है।

ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद संबंधित परिवार को एक Self-Enumeration ID (SE ID) जारी की जाएगी। जब बाद में गणनाकर्मी सत्यापन के लिए घर पहुंचेगा, तो नागरिक केवल यही आईडी दिखाएंगे। इसके आधार पर पहले से दर्ज जानकारी का मिलान किया जाएगा और आवश्यकता होने पर उसमें संशोधन किया जा सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को अधिक सुविधा देना और जनगणना प्रक्रिया को सरल बनाना है।

15 दिनों तक खुला रहेगा पोर्टल

पश्चिम बंगाल में 1 अगस्त से 15 अगस्त तक ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज करें ताकि बाद में सत्यापन की प्रक्रिया आसान हो सके।

इसके बाद 16 अगस्त से राज्यभर में घर-घर जाकर जनगणना का पहला चरण शुरू होगा। इस दौरान लगभग 1.8 लाख गणनाकर्मी (Enumerators) और करीब 30 हजार पर्यवेक्षक (Supervisors) लोगों के घर पहुंचकर जानकारी का सत्यापन करेंगे और आवास संबंधी विवरण एकत्र करेंगे।

पहले चरण में किन जानकारियों की होगी गणना?

पहले चरण में मुख्य रूप से हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का कार्य किया जाएगा। इसमें निम्नलिखित जानकारियां दर्ज की जाएंगी—

  • मकान और भवन का प्रकार
  • परिवार के सदस्यों की संख्या
  • आवास की स्थिति
  • घर पक्का है या कच्चा
  • पेयजल की व्यवस्था
  • शौचालय की उपलब्धता
  • बिजली की सुविधा
  • रसोई में इस्तेमाल होने वाला ईंधन
  • इंटरनेट और अन्य बुनियादी सुविधाएं
  • घर में उपलब्ध प्रमुख संसाधन

इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या से संबंधित विस्तृत जानकारी, जैसे परिवार के सदस्यों की आयु, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक और आर्थिक स्थिति आदि का विवरण एकत्र किया जाएगा।

दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं

सरकार ने साफ किया है कि जनगणना के दौरान नागरिकों से आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड या किसी अन्य सरकारी दस्तावेज की मांग नहीं की जाएगी।

लोगों से केवल उनके द्वारा दी गई जानकारी दर्ज की जाएगी। अधिकारियों ने नागरिकों से सही और तथ्यात्मक जानकारी देने की अपील की है ताकि देश के विकास से जुड़ी योजनाएं वास्तविक आंकड़ों के आधार पर तैयार की जा सकें।

स्कूलों की भी ली गई मदद

कोलकाता नगर निगम (KMC) ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए लगभग 1,000 स्कूलों को जोड़ा है।

कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों को "Census Prefect" के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इन विद्यार्थियों की भूमिका लोगों को डिजिटल जनगणना के प्रति जागरूक करना और उन्हें ऑनलाइन स्व-गणना की प्रक्रिया समझाना होगी। इससे सरकार को उम्मीद है कि अधिक से अधिक लोग स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज करेंगे।

डिजिटल जनगणना से क्या होंगे फायदे?

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना से कई बड़े लाभ मिलेंगे—

  • आंकड़ों की शुद्धता बढ़ेगी।
  • गलतियों की संभावना कम होगी।
  • डेटा संग्रहण और विश्लेषण तेज होगा।
  • कागज आधारित प्रक्रिया पर निर्भरता घटेगी।
  • सरकारी योजनाओं के लिए विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध होंगे।
  • भविष्य की नीतियां अधिक सटीक डेटा के आधार पर बनाई जा सकेंगी।
  • समय और सरकारी संसाधनों की बचत होगी।

क्यों महत्वपूर्ण है जनगणना?

जनगणना किसी भी देश के लिए केवल आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह सरकार के लिए नीति निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है।

इसी के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, बिजली, पेयजल, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, शहरी विकास और ग्रामीण योजनाओं का खाका तैयार किया जाता है। संसद और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन, संसाधनों के वितरण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की योजना बनाने में भी जनगणना के आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

सरकार की क्या है तैयारी?

केंद्र सरकार का दावा है कि जनगणना 2027 के लिए तकनीकी ढांचे को मजबूत किया गया है। डिजिटल पोर्टल, मोबाइल एप्लिकेशन और डेटा सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों और गणनाकर्मियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी की जा सके।

निष्कर्ष

जनगणना 2027 भारत की जनगणना व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है। पहली बार नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तेज बनने की उम्मीद है।

अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ यह डिजिटल मॉडल कितना सफल रहता है और आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों में इसे किस तरह लागू किया जाता है। यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो भारत की जनगणना व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल युग में प्रवेश कर जाएगी।

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