दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया इस समय अपने इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। सोमवार को देश के पश्चिमी हिस्से में आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस भूकंप में अब तक 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता या मलबे में दबे बताए जा रहे हैं। यह पिछले एक दशक में कोलंबिया में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है, जिसने देश को राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में ला खड़ा किया है।
कहां और कैसे आया यह भूकंप
अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक इस भूकंप का केंद्र सैन जोसे डेल पाल्मार नामक इलाके में था, जो राजधानी बोगोटा से करीब 400 किलोमीटर पश्चिम में स्थित एक छोटा सा कस्बा है, जिसकी आबादी करीब 4,800 है। भूकंप का असर देश के कई बड़े शहरों में महसूस किया गया, जिनमें कैली, पेरेरा और चोको क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। पेरेरा शहर में सबसे ज्यादा तबाही देखने को मिली, जहां अकेले सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि देश के तीसरे सबसे बड़े शहर कैली में भी करीब 95 लोगों की जान जा चुकी है। रिपोर्टों के मुताबिक इस भूकंप के बाद अब तक 70 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स यानी झटके भी दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे बचाव कार्य में जुटी टीमों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
तबाही का मंजर और बचाव अभियान
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक इस भूकंप से करीब 5,000 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि दर्जनों बड़ी इमारतें पूरी तरह ढह गई हैं। कैली शहर में अकेले 20 से ज्यादा बड़ी इमारतें जमींदोज हो गईं। देश के पांच बड़े शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, और सात हवाई अड्डों पर परिचालन को अस्थायी तौर पर रोक दिया गया है। बचाव दल क्रेन, खुदाई मशीनों और यहां तक कि अपने नंगे हाथों से भी मलबे में दबे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। कैली में भूकंप के करीब 30 घंटे बाद मलबे से एक महिला को जिंदा निकाला गया, वहीं एक अपार्टमेंट की इमारत के मलबे से एक बच्चे को बचाए जाने का दिल छू लेने वाला वीडियो भी सामने आया। इसके अलावा भूकंप की वजह से कैली के पास बुएनावेंतुरा में एक जेल में आग लग गई, जिसमें कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। पेरेरा शहर में बिजली आपूर्ति लगभग पूरी तरह ठप हो गई है, जिसके चलते हजारों लोगों को रातभर सड़कों पर या असुरक्षित घरों में गुजारना पड़ा, क्योंकि उन्हें और झटकों का डर सता रहा था।
राष्ट्रपति ने संभाली कमान, दुनियाभर से मिल रही मदद
गौरतलब है कि यह भूकंप ऐसे समय आया जब कोलंबिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति आबेलार्दो डे ला एस्प्रिएला ने सत्ता संभाले महज तीन दिन ही हुए थे। राष्ट्रपति ने तुरंत आपातकालीन समिति बुलाकर बचाव कार्यों की खुद निगरानी करने का ऐलान किया और देश की पूरी सैन्य व पुलिस व्यवस्था को राहत कार्यों में झोंक दिया। उन्होंने पेरेरा के कॉफी उत्पादक क्षेत्र रिसारल्दा के लिए तीन महीने की आर्थिक राहत का भी ऐलान किया है। गृह मंत्री रोड्रिगो लारा ने बताया कि फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान बचाव टीमों को मौके पर पहुंचाने, मेडिकल सप्लाई भेजने और फील्ड अस्पताल स्थापित करने पर केंद्रित है। इस आपदा के बाद अमेरिका, यूरोप, दक्षिण अमेरिका और मध्य-पूर्व के कई देशों ने भी कोलंबिया को राहत कार्यों में मदद पहुंचाने का भरोसा दिया है। संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसी OCHA के मुताबिक अब तक करीब 1,495 लोग घायल हो चुके हैं और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
दूरदराज इलाकों में बचाव कार्य बना चुनौती
भूकंप का केंद्र रहे चोको क्षेत्र में बचाव कार्य सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि यह इलाका बेहद दुर्गम और पहुंच से बाहर माना जाता है। अधिकारियों ने वहां इंजीनियरों, बचाव दलों और खोजी कुत्तों को तैनात किया है, लेकिन क्षेत्र की भौगोलिक बनावट के चलते वास्तविक तबाही का पूरा अंदाजा अभी तक नहीं लग पाया है। विशेषज्ञों के मुताबिक भूकंप के बाद के शुरुआती 72 घंटे किसी भी बचाव अभियान के लिए सबसे अहम माने जाते हैं, क्योंकि इसी दौरान मलबे में दबे लोगों के जीवित बचने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में बचाव टीमें दिन-रात एक कर मलबे को हटाने और जीवित बचे लोगों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई हैं।
आने वाले दिनों में जैसे-जैसे बचाव अभियान आगे बढ़ेगा, मृतकों और लापता लोगों की सही संख्या स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल पूरा देश इस भीषण त्रासदी से उबरने की कोशिश में जुटा है, और दुनियाभर से मिल रही मदद इस मुश्किल घड़ी में कोलंबिया के लिए एक बड़ा सहारा बनकर सामने आई है।




