'इकिगाई' एक जापानी शब्द है, जिसका मतलब है 'जीने की वजह' या 'वह चीज जो जिंदगी को जीने लायक बनाती है'। यह कॉन्सेप्ट सिर्फ करियर या बड़ी उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी खुशियों — जैसे बागवानी, खाना बनाना या परिवार के साथ समय बिताना — में भी छिपा हो सकता है। हाल के वर्षों में यह जापान से निकलकर दुनियाभर में लोकप्रिय हो गया है, और लोगों को जिंदगी में मकसद तलाशने में मदद कर रहा है।
क्या है इकिगाई का मतलब
'इकिगाई' दो जापानी शब्दों से मिलकर बना है — 'इकी' जिसका मतलब है 'जीवन' या 'जीवित', और 'गाई' जिसका मतलब है 'मूल्य' या 'योग्य होना'। इन दोनों को मिलाकर बना यह शब्द उस चीज को दर्शाता है जो आपकी जिंदगी को मूल्यवान और सार्थक बनाती है। जापानी मनोचिकित्सक मिएको कामिया ने सबसे पहले 1966 में अपनी किताब में इस कॉन्सेप्ट को औपचारिक रूप दिया था। असल जापानी संस्कृति में इकिगाई सिर्फ करियर या बड़े मिशन तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें रोजमर्रा की छोटी खुशियां, रिश्ते, दिनचर्या और शौक भी शामिल होते हैं।
मशहूर चार सर्कल वाला डायग्राम
पश्चिमी दुनिया में इकिगाई को आमतौर पर चार ओवरलैपिंग सर्कल वाले डायग्राम के जरिए समझाया जाता है। इस डायग्राम में चार सवाल पूछे जाते हैं — आपको क्या पसंद है, आप किस चीज में अच्छे हैं, दुनिया को किस चीज की जरूरत है, और आपको किस चीज के बदले पैसे मिल सकते हैं। जहां ये चारों सर्कल आपस में मिलते हैं, वहीं माना जाता है कि आपकी 'इकिगाई' छिपी है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि यह मशहूर चार-सर्कल डायग्राम असल में पारंपरिक जापानी अवधारणा नहीं है। इसे 2014 में एक ब्रितानी ब्लॉगर मार्क विन ने स्पेनिश ज्योतिषी आंद्रेस जुजुनागा के एक 'प्रयोजन' डायग्राम और जापान के ओकिनावा द्वीप की लंबी उम्र पर आधारित एक टेड टॉक को मिलाकर बनाया था, जो बाद में इंटरनेट पर काफी वायरल हो गया।
सेहत और लंबी उम्र से भी जुड़ाव
इकिगाई का संबंध सिर्फ मानसिक संतुष्टि तक सीमित नहीं, बल्कि यह शारीरिक स्वास्थ्य और लंबी उम्र से भी जुड़ा पाया गया है। जापान के ओहसाकी क्षेत्र में 43,391 वयस्कों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में इकिगाई की भावना नहीं थी, उनमें सात सालों के भीतर मृत्यु का खतरा 50 प्रतिशत तक ज्यादा था। इसी तरह अमेरिका में 50 साल से अधिक उम्र के करीब 7,000 वयस्कों पर हुए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में जिंदगी को लेकर स्पष्ट मकसद की कमी थी, उनमें मृत्यु का खतरा उन लोगों के मुकाबले 2.4 गुना ज्यादा था, जिनमें यह भावना सबसे मजबूत थी।
जापान का ओकिनावा द्वीप बना मिसाल
इकिगाई की लोकप्रियता बढ़ने की एक बड़ी वजह जापान का ओकिनावा द्वीप भी रहा है, जिसे दुनिया के उन 'ब्लू जोन' इलाकों में गिना जाता है जहां लोग सबसे लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीते हैं। यहां के बुजुर्ग अक्सर अपनी लंबी उम्र और खुशहाली का श्रेय एक स्पष्ट जीवन-उद्देश्य, करीबी सामाजिक रिश्तों और रोजमर्रा की सक्रियता को देते हैं। यही वजह है कि नेशनल जियोग्राफिक जैसे बड़े मीडिया संस्थानों ने भी इकिगाई और ब्लू जोन के बीच के इस रिश्ते पर खासा ध्यान दिया है।
पश्चिमी दुनिया में करियर से जोड़कर देखा जाना
स्पेनिश लेखक हेक्टर गार्सिया की किताब ने इस कॉन्सेप्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि पश्चिमी देशों में इसे अक्सर करियर और सफलता से जोड़कर देखा जाता है — यानी ऐसा काम खोजना जो आपको पसंद हो, जिसमें आप माहिर हों, जिसकी दुनिया को जरूरत हो, और जिसके बदले आपको उचित पारिश्रमिक भी मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यावहारिक पहलू इसे सिर्फ 'अपने जुनून का पीछा करो' जैसी सलाहों से ज्यादा असरदार बनाता है, क्योंकि यह आर्थिक पहलू को भी नजरअंदाज नहीं करता।
रोजमर्रा की जिंदगी में कैसे लाएं इकिगाई
असली जापानी अर्थ में इकिगाई सिर्फ यह नहीं है कि आप क्या करते हैं, बल्कि यह भी है कि आप उसे किस तरह करते हैं। छोटी-छोटी आदतों जैसे नियमित दिनचर्या बनाए रखना, अपने शौक के लिए समय निकालना, करीबी रिश्तों को मजबूत रखना, और हर दिन कुछ ऐसा करना जिससे संतुष्टि मिले — यही इकिगाई की असली भावना है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि हर किसी को अपनी इकिगाई खोजने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, बल्कि इस दिशा में लगातार प्रयास करते रहना ही असली मायने में संतोष और खुशहाली की ओर ले जाता है।





