अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में चीनी सेना की कथित घुसपैठ और आक्रामक गतिविधियों की रिपोर्टों के बीच भारत और चीन के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। भारत ने साफ कहा है कि सीमा से जुड़े मामले 'सबसे गंभीर' हैं और सीमा पर शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहद जरूरी है। वहीं चीन ने दावा किया है कि सीमा पर स्थिति 'फिलहाल आमतौर पर स्थिर' है, हालांकि उसने सैन्य गतिविधि बढ़ाए जाने के सवाल का सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा विवाद
यह विवाद अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी सेना की बढ़ी हुई गतिविधियों को लेकर सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों और वीडियो के बाद शुरू हुआ। इन दावों में भारत-चीन के बीच हाल में सैन्य आमना-सामना होने की भी बात कही गई थी। हालांकि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बीते हफ्ते इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा था कि उन्हें ऐसी किसी घुसपैठ पर भरोसा नहीं है, और उन्होंने सेना व स्थानीय संगठनों से बातचीत कर वास्तविक स्थिति का पता लगाने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना सीमा की प्रभावी ढंग से रक्षा कर रही है।
भारत ने चीन को दी सख्त चेतावनी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि भारत सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को 'सबसे गंभीर' मानता है, और नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति व स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के व्यापक संबंधों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि सीमा पर हालात का असर पूरे द्विपक्षीय रिश्ते की दिशा पर पड़ेगा। जायसवाल ने बताया कि 6 अगस्त 2026 को भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) की 36वीं बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया था, जिसमें दोनों पक्षों के बीच 'स्पष्ट चर्चा' हुई और LAC पर स्थिति की समीक्षा की गई।
चीन का जवाब- 'स्थिति फिलहाल स्थिर'
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बुधवार को मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा, "चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल आमतौर पर स्थिर है।" हालांकि उन्होंने भारत के साथ हाल में किसी सैन्य घटना या अरुणाचल सीमा के पास चीन द्वारा सैन्य गतिविधि बढ़ाए जाने से जुड़े सीधे सवालों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने 6 अगस्त की WMCC बैठक का हवाला देते हुए कहा कि दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों से संवाद बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति कायम रखने पर सहमत हुए हैं।
27 जगहों के नामकरण पर भी पहले हुआ था विवाद
इस ताजा तनाव से पहले भी भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवाद हुआ था, जब भारत ने 7 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों — जिनमें भूमि क्षेत्र, पहाड़ी दर्रे, एक झील और एक स्मारक शामिल हैं — को उनके आधिकारिक नामों से अपने राष्ट्रीय मानचित्र पर औपचारिक रूप से चिह्नित किया था। चीन के सरकारी मीडिया ने इस कदम की तीखी आलोचना करते हुए इसे 'आत्म-भ्रम' करार दिया था और कहा था कि यह द्विपक्षीय संबंधों की सकारात्मक दिशा को कमजोर करता है।
लंबे समय से जारी है सीमा विवाद
गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा पर सीमा विवाद दशकों से चला आ रहा है, और चीन अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिण तिब्बत' का हिस्सा बताते हुए इसे कभी मान्यता नहीं देता। दोनों देश अब तक इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कई दौर की बातचीत कर चुके हैं, लेकिन विवाद पूरी तरह हल नहीं हो पाया है। भारत लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
आगे क्या
फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों से संवाद जारी रहने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत को लेकर स्पष्टता अभी भी सीमित है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारतीय सेना और सरकार की तरफ से अपर सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी गतिविधियों को लेकर कोई और आधिकारिक बयान आता है या नहीं, और क्या यह तनाव आगे किसी बड़े राजनयिक कदम की वजह बनता है।





