मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। ईरान ने अमेरिका के लिए सख्त बयान दिया है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिका को उनकी मांगें माननी होंगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्षेत्रीय सुरक्षा शामिल हैं। ईरान के नेताओं ने कहा है कि अगर अमेरिका समाधान चाहता है, तो उसे ईरानी जनता के अधिकारों को स्वीकार करना होगा। ईरान ने अमेरिका के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें आर्थिक प्रतिबंध हटाना, विदेशों में फंसी संपत्तियों को रिलीज करना, अमेरिकी सैन्य दबाव खत्म करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के अधिकारों को मान्यता देना शामिल हैं।
ईरान का कहना है कि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका “अनुचित और अव्यावहारिक” मांगें कर रहा है। ईरान ने साफ किया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा और यूरेनियम संवर्धन उसका अधिकार है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाए रखने का फैसला किया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान को परमाणु गतिविधियों में कटौती करनी होगी और क्षेत्रीय सैन्य नेटवर्क को कमजोर करना होगा। लेकिन ईरान इन मांगों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ बता रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान ने हाल के महीनों में इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तेहरान ने जहाजों पर नियंत्रण और टोल व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा है। युद्ध का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अगर बातचीत विफल रही तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है। ईरान ने भी चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वह “नए मोर्चे” खोल देगा।
पाकिस्तान और कतर जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर की टीम तेहरान पहुंच चुकी है और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पाकिस्तान भी अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कराने में सक्रिय बताया जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और निवेशकों में चिंता का माहौल है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बाधित होता है तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान अपने रुख पर अड़ा हुआ है और अमेरिका भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में कोई समझौता नहीं हुआ तो मिडिल ईस्ट में एक नया बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।





