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झारखंड में बड़ी जीत: सरकार ने 3 परीक्षाएं रद्द कीं, JPSC के तीनों सदस्यों का इस्तीफा, 16 दिन बाद टूटा गतिरोध

झारखंड में 16 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को बड़ी सफलता मिली है। सोमवार को विधानसभा घेराव मार्च के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन कार्रवाई के बाद आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा — तीन विवादित भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी गईं, और JPSC के तीनों सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। यह आंदोलन 5 जुलाई को 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोपों से शुरू हुआ था। हालांकि CBI या स्वतंत्र न्यायिक जांच जैसी बाकी मांगें अब भी लंबित हैं, और छात्र संगठन भर्ती प्रक्रिया में स्थायी सुधार की मांग जारी रखे हुए हैं।

India Junction News Desk
11/8/2026
झारखंड में बड़ी जीत: सरकार ने 3 परीक्षाएं रद्द कीं, JPSC के तीनों सदस्यों का इस्तीफा, 16 दिन बाद टूटा गतिरोध

झारखंड में पिछले 16 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को आखिरकार बड़ी सफलता मिली है। सोमवार को राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के आरोपों के बीच तीन परीक्षाएं रद्द करने का ऐलान किया, और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीनों सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सोमवार सुबह प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा घेराव मार्च शुरू किया था, जिसे रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

5 जुलाई से चल रहा था आंदोलन

यह पूरा आंदोलन 5 जुलाई से चल रहा था, जब छात्रों ने 2 जुलाई को JPSC द्वारा आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ियों का आरोप लगाया था। इसके अलावा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) 2023 परीक्षा भी विवाद का एक और बड़ा मुद्दा रही। प्रदर्शनकारी छात्र और अभ्यर्थी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठे थे, और अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल भी जारी रखे हुए थे।

विधानसभा घेराव और पुलिस कार्रवाई

सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने 'विधानसभा घेराव' मार्च शुरू किया, जिसमें झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) नेता देवेंद्र नाथ महतो एंबुलेंस में सवार होकर शामिल हुए। मार्च को आगे बढ़ने से रोकने के लिए झारखंड पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इसी बीच 6 अगस्त को झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र भी विपक्ष के विरोध और छात्र आंदोलन के बीच शुरू हुआ था, जिसके दौरान पुलिस ने 19 लोगों को हिरासत में लिया था।

बार-बार बातचीत रही नाकाम

आंदोलन के दौरान झारखंड सरकार और छात्र संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन हर बार यह गतिरोध टूट नहीं पाया। शनिवार को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की अगुवाई में एक चार सदस्यीय कैबिनेट पैनल ने JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के प्रतिनिधियों के साथ-साथ NSUI, आदिवासी छात्र संघ और JMM समर्थित झारखंड छात्र मोर्चा के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की थी। छात्रों की मुख्य मांगें थीं — 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करना, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की CBI या न्यायिक जांच कराना, और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करना।

आखिरकार सरकार झुकी

सोमवार को विधानसभा घेराव मार्च के दौरान बढ़े तनाव के बाद आखिरकार राज्य सरकार को झुकना पड़ा। सरकार ने तीन विवादित परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया, और इसके साथ ही JPSC के तीनों सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। यह घटनाक्रम 16 दिनों से चल रहे इस आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर देखी गई।

झारखंड आपराधिक जांच विभाग (CID) पहले से कर रहा जांच

गौरतलब है कि झारखंड आपराधिक जांच विभाग (CID) ने 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर पहले ही भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर रखी है। इसके अलावा 17, 12 और 13वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षाओं और JSSC CGL परीक्षा को लेकर भी पहले से गंभीर आरोप लगते रहे हैं।

आगे क्या

फिलहाल तीन परीक्षाओं के रद्द होने और JPSC सदस्यों के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों की कई मांगें पूरी हो चुकी हैं, लेकिन CBI या स्वतंत्र न्यायिक जांच जैसी बाकी मांगों पर अभी स्थिति साफ नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार आगे भर्ती प्रक्रिया में सुधार को लेकर क्या ठोस कदम उठाती है, और क्या छात्र संगठन इस घटनाक्रम के बाद अपना आंदोलन पूरी तरह समाप्त करते हैं या बाकी मांगों को लेकर आगे भी दबाव बनाए रखते हैं।

राजनीतिक दलों का भी मिला समर्थन

इस पूरे आंदोलन के दौरान कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), आदिवासी छात्र संघ, JMM समर्थित झारखंड छात्र मोर्चा और JLKM जैसे राजनीतिक रूप से जुड़े संगठनों ने भी प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन दिया। इससे यह आंदोलन सिर्फ एक छात्र मुद्दा न रहकर राज्य की व्यापक राजनीति का हिस्सा बन गया, जिसमें विभिन्न दलों ने अपने-अपने तरीके से छात्रों की आवाज को आगे बढ़ाने की कोशिश की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी कैबिनेट पैनल की तरफ से आंदोलन और बातचीत की नियमित जानकारी दी जाती रही, जिसके बाद ही सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया।

भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग बरकरार

हालांकि तीन परीक्षाएं रद्द होने और JPSC सदस्यों के इस्तीफे को बड़ी जीत माना जा रहा है, लेकिन छात्र संगठनों का कहना है कि यह सिर्फ पहला कदम है। उनकी मुख्य मांग अब भी यही है कि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां दोबारा न हों, इसके लिए भर्ती प्रक्रिया में स्थायी और ठोस सुधार किए जाएं। सरकार ने इसके लिए एक समर्पित ईमेल आईडी भी जारी की है, जिसके जरिए छात्र और अन्य हितधारक भर्ती प्रक्रिया को बेहतर बनाने के सुझाव भेज सकते हैं।

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