सिडनी। जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में बढ़ रही गर्मी न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में हुए एक नए अध्ययन से पता चलता है कि अत्यधिक गर्मी के कारण लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं में, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जब तापमान सामान्य से बहुत अधिक हो जाता है, तो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि होती है। इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि गर्म मौसम के दौरान जो लोग पहले से ही मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं, उनकी स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
युवाओं पर इसका अधिक असर पड़ता है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कई वर्षों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया और पाया कि किशोरों और 24 वर्ष तक की आयु के युवाओं में अत्यधिक गर्मी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम सामान्य दिनों की तुलना में अधिक था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक संयोग नहीं है, बल्कि बढ़ते तापमान और मानसिक स्वास्थ्य के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध की ओर संकेत करता है। हालांकि, इसके पीछे के सभी कारणों को जानने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।
गर्मी का असर हमारे शरीर के साथ-साथ हमारे मस्तिष्क पर भी पड़ता है। लगातार गर्म वातावरण में रहने से नींद प्रभावित हो सकती है, तनाव बढ़ सकता है, चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है, और भावनात्मक संतुलन बिगड़ सकता है। यही कारण है कि जो लोग पहले से अवसाद, चिंता या अन्य मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनकी परेशानी बढ़ सकती है। कुछ शोध बताते हैं कि गर्म मौसम में शरीर पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता और व्यवहार को भी प्रभावित कर सकता है।
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई हिस्सों में हीटवेव पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्र हो रही हैं। ऐसे में, मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाना जरूरी होता जा रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं में हीटवेव से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि जोखिम वाले लोगों को समय पर सहायता मिल सके।
कुछ लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, जिनमें शामिल हैं:
* पहले से मानसिक बीमारी का इलाज करा रहे मरीज
* बच्चे और किशोर
* बुजुर्ग
* लंबे समय तक खुले वातावरण में काम करने वाले लोग
* ऐसे लोग जिन्हें पर्याप्त ठंडा वातावरण या आराम नहीं मिल पाता
इन लोगों को गर्मी के दौरान पर्याप्त पानी पीना, सीधी धूप से बचना, पर्याप्त नींद लेना, और मानसिक तनाव बढ़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अत्यधिक गर्मी के दौरान बेचैनी, घबराहट, नींद न आना, अत्यधिक तनाव, उदासी या व्यवहार में अचानक बदलाव महसूस हो तो इसे सामान्य मौसम का प्रभाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष यह है कि ऑस्ट्रेलिया के इस अध्ययन ने यह संकेत दिया है कि बढ़ता तापमान केवल पर्यावरणीय या शारीरिक चुनौती नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर जोखिम बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जलवायु के दौर में लोगों को हीटवेव से बचाव के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक रहने की आवश्यकता है। आने वाले समय में इस विषय पर और व्यापक शोध तथा प्रभावी स्वास्थ्य नीतियां बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।





