लखनऊ, राजधानी शहर, जहां अदालतें न्याय का प्रतीक मानी जाती हैं, वहीं एक दिन अदालत परिसर जंग का मैदान बन गया। कैसरबाग स्थित पुराने हाईकोर्ट और सिविल कोर्ट परिसर के बाहर ऐसा हंगामा हुआ, जिसने पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। एक तरफ नगर निगम का बुलडोजर था, दूसरी तरफ काले कोट में खड़े सैकड़ों वकील, और बीच में पुलिस की लाठियां, धक्का-मुक्की, चीख-पुकार और भगदड़। जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने हर किसी को हैरान कर दिया।
दरअसल, नगर निगम और जिला प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे। प्रशासन का कहना था कि कोर्ट परिसर के बाहर बने कई चैंबर और दुकानें अवैध कब्जे में थीं। दावा किया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की जा रही है और सरकारी जमीन व नाले पर बने निर्माण हटाना जरूरी है। लेकिन जैसे ही बुलडोजर ने आगे बढ़ना शुरू किया, माहौल अचानक बदल गया। सैकड़ों वकील सड़क पर उतर आए। किसी ने बुलडोजर के सामने बैठकर विरोध शुरू कर दिया, तो किसी ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ ही मिनटों में हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस और वकीलों के बीच सीधी भिड़ंत शुरू हो गई।
वीडियो में साफ दिखाई दिया कि कोर्ट परिसर के बाहर अफरा-तफरी मची हुई है। पुलिस लोगों को पीछे हटाने की कोशिश कर रही है, वकील लगातार विरोध कर रहे हैं, और इसी दौरान धक्का-मुक्की शुरू हो गई। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। कई वकीलों के घायल होने की खबर सामने आई। वहीं वकीलों का आरोप है कि प्रशासन ने तय सीमा से कहीं ज्यादा चैंबर तोड़ दिए। उनका कहना है कि उनके जरूरी दस्तावेज, केस फाइलें और वर्षों की मेहनत मलबे में दब गई। कई अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त समय और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गई।
आज इस पूरे मामले में बड़ा अपडेट सामने आया। भारी विरोध और तनाव को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल कार्रवाई की रफ्तार धीमी कर दी है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार वकीलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रहे हैं ताकि टकराव को रोका जा सके। कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। डीसीपी और नगर निगम के अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन हर हाल में होगा और अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी।
दूसरी तरफ वकीलों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। आज भी कई अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया, सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए, और चेतावनी दी कि अगर बिना समाधान के कार्रवाई जारी रही, तो आंदोलन और बड़ा होगा। कई बार एसोसिएशन इस मुद्दे पर एकजुट होती दिखाई दे रही हैं। अब यह मामला सिर्फ अतिक्रमण हटाने का नहीं रह गया है, बल्कि सम्मान, अधिकार और प्रशासनिक रवैये की लड़ाई बन चुका है। राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना की जोरदार चर्चा हो रही है। विपक्ष सरकार पर बुलडोजर राजनीति का आरोप लगा रहा है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या राजधानी में कानून व्यवस्था संभालने का तरीका यही रह गया है? क्या बातचीत से हल नहीं निकाला जा सकता था? क्योंकि जिस तरह अदालत परिसर के बाहर पुलिस और वकील आमने-सामने आए, उसने पूरे सिस्टम की तस्वीर बदलकर रख दी।





