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मौत के 17 घंटे बाद जिंदा हुईं शीला देवी का 9 दिन बाद निधन, परिजनों ने अस्पताल पर लगाए लापरवाही के आरोप

आगरा में मौत के 17 घंटे बाद 'चमत्कारिक' तरीके से जिंदा हुईं 65 वर्षीय शीला देवी का रविवार को नौ दिन बाद निधन हो गया। बदायूं के एक निजी अस्पताल में 30 जुलाई को उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था, लेकिन अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान दामाद का हाथ पकड़ते ही उनके शरीर में हलचल देखी गई, जिसके बाद परिजन उन्हें आगरा के एक अस्पताल ले गए। नौ दिन इलाज चलने के बाद भी वे नहीं बच सकीं। परिजनों ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही और ₹5 लाख से ज्यादा का भारी बिल थमाने का आरोप लगाया है, और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

India Junction News Desk
11/8/2026
मौत के 17 घंटे बाद जिंदा हुईं शीला देवी का 9 दिन बाद निधन, परिजनों ने अस्पताल पर लगाए लापरवाही के आरोप

आगरा में मौत के 17 घंटे बाद 'चमत्कारिक' तरीके से जिंदा हुईं 65 वर्षीय शीला देवी का रविवार को निधन हो गया। बदायूं के एक निजी अस्पताल में 30 जुलाई को उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था, लेकिन अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान उनके शरीर में हलचल देखी गई। नौ दिन तक आगरा के एक अस्पताल में उनका इलाज चला, लेकिन आखिरकार वे जिंदगी की जंग हार गईं। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में गंभीर लापरवाही और भारी बिल थमाने का आरोप लगाया है।

कैसे हुई थी 'चमत्कारिक' वापसी

शीला देवी लंबे समय से लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। दिल्ली में पीलिया की सर्जरी के बाद उन्हें बदायूं के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनके छोटे बेटे संजीव कुमार बदायूं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं। 30 जुलाई को अस्पताल ने परिजनों को सूचित किया कि शीला देवी की मौत हो गई है। इसके बाद बेटा शव को एंबुलेंस से लेकर शाम करीब 7 बजे आगरा स्थित घर पहुंचा। शव को घर के एक कमरे में जमीन पर रखा गया, अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं, और फूल-माला भी आ चुके थे।

लेकिन करीब 17 घंटे बाद, रात करीब 8 बजे, 65 वर्षीय महिला के शरीर में अचानक हलचल हुई। दामाद ने जब उनके पैर छुए, तो शीला देवी ने उनका हाथ पकड़ लिया, जिससे वहां मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए। परिजनों ने तुरंत उन्हें आगरा के घटिया आजम खान स्थित एक निजी अस्पताल (पार्क अस्पताल) में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज शुरू हुआ।

नौ दिन तक चला इलाज, आखिरकार टूटी उम्मीद

अस्पताल में भर्ती होने के बाद परिवार को उम्मीद जगी थी कि शीला देवी पूरी तरह ठीक हो जाएंगी। नौ दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चलता रहा। हालांकि रविवार सुबह उनकी सांसें दोबारा थम गईं, और इस तरह एक ऐसी घटना, जिसने पूरे इलाके में चर्चा और उम्मीद दोनों जगा दी थी, आखिरकार दुखद अंत तक पहुंच गई।

परिजनों का लापरवाही का आरोप, भारी बिल पर भी सवाल

शीला देवी के निधन के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश देखा गया। उन्होंने आगरा के अस्पताल के चिकित्सकों पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि नौ दिनों के इलाज के बावजूद अस्पताल उन्हें बचा नहीं पाया, जबकि इस दौरान उन्हें ₹5 लाख से ज्यादा का भारी-भरकम बिल थमाया गया। परिजनों ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद उचित इलाज क्यों नहीं मिल पाया।

बदायूं के अस्पताल पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर बदायूं के अस्पताल ने शीला देवी को मृत कैसे घोषित कर दिया, जबकि वे उस वक्त जीवित थीं। परिवार ने अब तक उस अस्पताल का नाम सार्वजनिक तौर पर उजागर नहीं किया है, लेकिन इस लापरवाही ने मेडिकल क्षेत्र में मौत की पुष्टि करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं, हालांकि दुर्लभ हैं, लेकिन जब भी होती हैं तो चिकित्सा प्रणाली की जवाबदेही पर बड़ा सवालिया निशान लगा देती हैं।

सोशल मीडिया पर भी बनी चर्चा का विषय

शीला देवी की यह घटना सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक चर्चा हो रही थी। कई लोगों ने इसे एक 'चमत्कार' बताया था, तो वहीं कुछ ने इसे मेडिकल लापरवाही का गंभीर मामला करार दिया था। उनके निधन की खबर के बाद एक बार फिर यह विषय सुर्खियों में आ गया है, और लोग अस्पतालों में मौत की पुष्टि की प्रक्रिया को और सख्त बनाने की मांग कर रहे हैं।

आगे क्या

परिजनों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इलाज के दौरान वास्तव में कोई लापरवाही हुई थी या नहीं। यह देखना बाकी है कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग या स्थानीय प्रशासन की तरफ से आगे क्या कार्रवाई की जाती है, और क्या बदायूं के उस अस्पताल के खिलाफ भी किसी तरह की जांच शुरू होती है, जहां शुरुआत में गलत तरीके से मौत की घोषणा की गई थी।

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