देश अभी दिल्ली के मालवीय नगर में हुई आग की दर्दनाक घटना से उबर भी नहीं पाया था कि आज बिहार के मुजफ्फरपुर से एक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ गई। दिल्ली में एक होटल की ऊपरी मंजिलों पर लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूद रहे थे। वहीं, बिहार में एक अस्पताल के ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहे मरीज आग और धुएं के बीच फंस गए।
सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि आग कैसे लगी, बल्कि यह भी है कि कब तक लापरवाही की आग में लोगों की जान जाती रहेगी? आइए पहले बात करते हैं बिहार की। मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में आज तड़के करीब 3 बजे अचानक ICU वार्ड में आग लग गई। जिन मरीजों को डॉक्टर और मशीनें जिंदगी देने की कोशिश कर रही थीं, वे अचानक मौत के धुएं में घिर गए। कई मरीज बेड से उठ भी नहीं सकते थे।
अब तक कम से कम 5 लोगों की मौत की खबर है और कई अन्य मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। लेकिन इससे पहले कि हम इसे समझें, हमें 24 घंटे पीछे जाना होगा। दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार सुबह एक होटल में आग लगी जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। दिल्ली हादसे की जांच में सामने आया कि जिस भवन में होटल चल रहा था, वहां फायर सेफ्टी से जुड़े गंभीर सवाल थे।
अब जरा सोचिए... एक दिन पहले होटल में लोग जिंदा जल गए, अगले ही दिन अस्पताल के ICU में मरीज आग का शिकार हो गए। इन घटनाओं में जगह अलग है, राज्य अलग हैं, लेकिन कहानी एक जैसी है। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, नियमों की अनदेखी और हादसे के बाद कार्रवाई का वादा। दिल्ली से लेकर बिहार तक, इन दो अग्निकांडों ने देश को एक कड़वा सच दिखाया है। आग सिर्फ इमारतों में नहीं लगी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के उन दावों को भी जला गई जो अक्सर कागजों पर ही दिखाई देते हैं।
फिलहाल दोनों मामलों में जांच जारी है। लेकिन देश यह जानना चाहता है कि आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? और सबसे बड़ा सवाल... अगला नंबर किसका होगा?





