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यूपी विधानसभा में हंगामा, अनिश्चितकाल के लिए स्थगित; CM योगी ने सपा पर बोला हमला

बुधवार को यूपी विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी, शिक्षक भर्ती और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर जोरदार हंगामा किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद CM योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष ने जनहित से जुड़े मुद्दों और ₹59,000 करोड़ के अनुपूरक बजट पर चर्चा नहीं होने दी। वहीं विपक्ष का कहना है कि वह जनता के ही गंभीर सवाल उठा रहा था। 2027 के यूपी चुनाव नजदीक आने के साथ यह सियासी टकराव और बढ़ने की उम्मीद है।

India Junction News Desk
6/8/2026
यूपी विधानसभा में हंगामा, अनिश्चितकाल के लिए स्थगित; CM योगी ने सपा पर बोला हमला

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बाद कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष ने जनहित के मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दी।

सदन में क्या हुआ

बुधवार को यूपी विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने कई मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। प्रश्नकाल के दौरान ही राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी, शिक्षक भर्ती और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने विरोध जताया। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही पहले कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी, और दोबारा शुरू होने पर भी माहौल शांत नहीं हुआ। आखिरकार लगातार जारी गतिरोध को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। हालांकि इस हंगामे के बीच भी सरकार कुछ अहम विधेयक पेश कर उन्हें पारित कराने में सफल रही।

CM योगी की मीडिया से बातचीत

सदन स्थगित होने के बाद विधान भवन, लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र का मकसद जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा करना था, लेकिन विपक्ष ने इसे सिर्फ हंगामे तक सीमित कर दिया। सीएम ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का रवैया शुरू से ही नकारात्मक रहा और उसने विकास से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा नहीं होने दी। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के इस व्यवहार से युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीबों से जुड़े अहम मुद्दे पीछे छूट गए।

अनुपूरक बजट पर चर्चा अधूरी रह गई

इस मानसून सत्र में सरकार ने करीब ₹59,000 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया था, जिसमें युवाओं के रोजगार, किसानों के कल्याण, महिला सशक्तिकरण और गरीबों से जुड़ी कई योजनाओं का प्रावधान बताया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए थी, ताकि सभी दल अपने सुझाव रख सकें, लेकिन लगातार हंगामे के कारण यह चर्चा पूरी नहीं हो सकी।

विपक्ष का पक्ष

हालांकि विपक्षी दलों का कहना रहा कि वे जनहित के ही मुद्दे उठा रहे थे और सरकार उन गंभीर सवालों से बचना चाहती थी। सपा समेत अन्य विपक्षी सदस्यों ने राम मंदिर चढ़ावा मामले और शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं को लेकर सरकार से सीधे जवाब मांगे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर हंगामे की स्थिति बनाकर असल मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है।

आगे क्या

विधानसभा सत्र के इस तरह अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही यह टकराव आने वाले समय में और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों ही पक्ष जनता के बीच अपनी-अपनी बात पहुंचाने की कोशिश में जुटे हैं। फिलहाल यह देखना बाकी है कि अनुपूरक बजट से जुड़े मुद्दों और विपक्ष की मांगों पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।

चुनाव से पहले बढ़ती सियासी गर्मी

यूपी विधानसभा में हुआ यह हंगामा ऐसे समय पर हुआ है जब राज्य में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही अपनी-अपनी रणनीति के तहत जनता के बीच अपनी छवि मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा जहां विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं को आगे रखकर अपनी उपलब्धियां गिनाने की कोशिश कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल सरकार की नाकामियों और अनसुलझे मुद्दों को जनता के सामने लाने पर जोर दे रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र में हुआ यह गतिरोध आने वाले विधानसभा सत्रों में भी दोहराया जा सकता है, खासकर जब चुनाव नजदीक आते जाएंगे। ऐसे हालात में जनता से जुड़े जरूरी मुद्दों पर ठोस चर्चा हो पाना मुश्किल हो सकता है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों तक योजनाओं और सुविधाओं के पहुंचने में देरी के रूप में देखने को मिल सकता है।

फिलहाल दोनों पक्षों की तरफ से एक-दूसरे पर आरोप लगाने का सिलसिला जारी है, लेकिन असल मुद्दा वही बना हुआ है जिससे शुरुआत में सदन में हंगामा हुआ था — यानी अनुपूरक बजट, शिक्षक भर्ती और राम मंदिर चढ़ावा जैसे संवेदनशील विषयों पर पारदर्शी और सार्थक चर्चा। आने वाले सत्रों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों पक्ष इन मुद्दों पर बातचीत की कोई ठोस राह निकाल पाते हैं, या यह टकराव यूं ही जारी रहता है।

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