जिनेवा: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक सड़क सुरक्षा पर जारी नई जानकारी में कहा है कि दुनिया भर में सड़क हादसों से होने वाली मौतों में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह प्रगति दिखाती है कि सुरक्षित सड़क डिजाइन, बेहतर वाहन मानक, प्रभावी कानून और समय पर आपात चिकित्सा मिलकर लोगों की जान बचा सकते हैं। इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाएं आज भी सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। हर मौत के पीछे एक परिवार, समुदाय और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालीन असर होता है, इसलिए केवल प्रतिशत में सुधार को अंतिम सफलता नहीं माना जा सकता।
कमी के बावजूद खतरा क्यों बड़ा है
सड़क हादसों का बोझ सभी देशों में समान नहीं है। कम और मध्यम आय वाले देशों में तेज शहरीकरण, बढ़ते वाहनों, मिश्रित यातायात और सीमित सुरक्षित बुनियादी ढांचे के कारण जोखिम अधिक हो सकता है। एक ही सड़क पर तेज कारें, बसें, मोटरसाइकिल, साइकिल और पैदल यात्री चलते हैं, लेकिन हर उपयोगकर्ता को पर्याप्त सुरक्षित जगह नहीं मिलती। खराब रोशनी, अस्पष्ट संकेत, असुरक्षित चौराहे और फुटपाथ की कमी छोटी गलती को भी जानलेवा घटना में बदल सकती है।
बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों, पैदल यात्रियों, साइकिल सवारों और दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सुरक्षा की जरूरत होती है। इनके शरीर के चारों ओर कार जैसी सुरक्षा संरचना नहीं होती, इसलिए टक्कर की स्थिति में गंभीर चोट की आशंका अधिक रहती है। गति यहां निर्णायक भूमिका निभाती है। वाहन की रफ्तार बढ़ने के साथ चालक को प्रतिक्रिया के लिए कम समय मिलता है, ब्रेक लगाने की दूरी बढ़ती है और टक्कर की ऊर्जा कई गुना हो जाती है। इसी कारण स्कूल, बाजार, अस्पताल और आवासीय क्षेत्रों में कम तथा प्रभावी गति सीमा जरूरी मानी जाती है।
किन उपायों से जान बच सकती है
सड़क सुरक्षा के लिए केवल चालान या जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं। विशेषज्ञ सुरक्षित प्रणाली के दृष्टिकोण पर जोर देते हैं, जिसमें यह स्वीकार किया जाता है कि इंसान से गलती हो सकती है, लेकिन सड़क व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि उस गलती की कीमत मौत न बने। सुरक्षित पैदल पारपथ, अलग साइकिल लेन, नियंत्रित चौराहे, सड़क किनारे अवरोध, पर्याप्त रोशनी और गति कम करने वाली डिजाइन दुर्घटना तथा चोट दोनों का जोखिम घटा सकती है। निर्माण या मरम्मत से पहले सड़क सुरक्षा ऑडिट भी खतरनाक स्थानों की पहचान में मदद करता है।
वाहनों में सीट बेल्ट, एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण, उन्नत ब्रेकिंग और पैदल यात्री सुरक्षा जैसी तकनीकें महत्वपूर्ण हैं। दोपहिया चालकों के लिए सही मानक वाला हेलमेट और उसका ठीक तरीके से बांधा जाना जीवनरक्षक साबित हो सकता है। बच्चों को उनकी उम्र और वजन के अनुसार उपयुक्त चाइल्ड रेस्ट्रेंट में बैठाना चाहिए। सरकारों के लिए जरूरी है कि सुरक्षा मानक केवल कागज पर न रहें, बल्कि वाहन जांच, बाजार निगरानी और उल्लंघन पर कार्रवाई के जरिए लागू भी हों।
कानून के साथ भरोसेमंद प्रवर्तन
शराब या नशीले पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाना, तेज गति, मोबाइल फोन का इस्तेमाल, सीट बेल्ट न लगाना और हेलमेट नियम तोड़ना बड़े जोखिम कारक हैं। इनके लिए स्पष्ट कानून और लगातार, निष्पक्ष प्रवर्तन की जरूरत है। कैमरा आधारित गति निगरानी तथा वैज्ञानिक तरीके से चुने गए जांच स्थल प्रभावी हो सकते हैं, लेकिन तकनीक के इस्तेमाल में पारदर्शिता और नागरिकों की निजता का ध्यान भी रखा जाना चाहिए। जुर्माने का उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि जोखिम भरा व्यवहार बदलना होना चाहिए।
व्यवहार परिवर्तन के लिए जनसंचार अभियान उपयोगी हैं, खासकर जब उनका संदेश स्थानीय भाषा और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप हो। हालांकि सुरक्षित व्यवहार की जिम्मेदारी केवल व्यक्ति पर डालना उचित नहीं है। यदि पैदल यात्री के लिए फुटपाथ ही नहीं है या बस स्टॉप सड़क के खतरनाक मोड़ पर बनाया गया है, तो जागरूकता अकेले समस्या हल नहीं कर सकती। परिवहन, स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा और शहरी विकास विभागों को साझा लक्ष्य तथा आंकड़ों के आधार पर काम करना होगा।
हादसे के बाद पहला घंटा अहम
दुर्घटना होने के बाद तेज और व्यवस्थित प्रतिक्रिया मौत तथा स्थायी विकलांगता का जोखिम कम कर सकती है। एकीकृत आपात नंबर, प्रशिक्षित एम्बुलेंस कर्मचारी, सही स्थान की त्वरित पहचान और अस्पतालों में ट्रॉमा देखभाल की उपलब्धता जरूरी है। राहगीरों को प्राथमिक सहायता का प्रशिक्षण और मदद करने वाले नागरिकों के लिए कानूनी संरक्षण भी प्रतिक्रिया समय सुधार सकता है। दुर्घटना पीड़ितों के पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परिवार की आर्थिक मदद को भी सड़क सुरक्षा नीति का हिस्सा माना जाना चाहिए।
बेहतर आंकड़ों से बेहतर नीति
कई देशों में पुलिस, अस्पताल और बीमा एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर रहता है। यदि मौत, गंभीर चोट, दुर्घटना स्थल और जोखिम कारक सही दर्ज नहीं होंगे तो सबसे खतरनाक सड़कों तथा प्रभावी उपायों की पहचान मुश्किल होगी। साझा डिजिटल डेटा प्रणाली, गोपनीयता सुरक्षा और नियमित सार्वजनिक रिपोर्टिंग से सरकारें निवेश को प्राथमिकता दे सकती हैं। सफलता को केवल दुर्घटनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि मौतों और गंभीर चोटों में वास्तविक कमी से मापना चाहिए।
वैश्विक स्तर पर 21 प्रतिशत की गिरावट उम्मीद जगाती है, लेकिन प्रगति को हर देश, शहर और समुदाय तक पहुंचाना अगली बड़ी चुनौती है। सुरक्षित गतिशीलता शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का आधार है। सड़कें तभी सफल मानी जाएंगी जब बच्चे, बुजुर्ग, पैदल यात्री और वाहन चालक सभी बिना अनावश्यक जोखिम के यात्रा कर सकें। यह लेख WHO की आधिकारिक घोषणा पर आधारित है। मूल जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर उपलब्ध है।




